रूसी और चीनी कंपनियों पर पूर्व में भी लग चुका है बैन
इससे पहले ट्रम्प प्रशासन ने अगस्त और जून में भी North Korea के मिसाइल कार्यक्रम में मदद करने वाली रूसी और चीनी कंपनियों पर बैन लगाया था। हालांकि पहली बार अमेरिका की ओर से उत्तर कोरिया के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई की गई है।
ट्रम्प प्रशासन की इस कार्रवाई से कोरियाई द्वीप में एक बार फिर से जंग के हालात पैदा हो सकते हैं। North Korea का सनकी तानाशाह मानने वाला नहीं है। दक्षिण कोरिया से बातचीत का सिलसिला उसने यूं ही नहीं शुरू किया है। वो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को नजरअन्दाज करने के लिए ही दक्षिण कोरिया के साथ मेल-मिलाप करने पर राजी हुआ है।
ऐसे में ये समझना कि वह अमेरिका की शर्तों को मान लेगा, समझ से परे है। फिर भी देखिए आगे-आगे होता है क्या?
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