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भारी हंगामे के बीच लोकसभा स्पीकर के खिलाफ ध्वनिमत से अविश्वास प्रस्ताव खारिज, सदन की कार्यवाही स्थगित

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लोकसभा में विपक्ष द्वारा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में लंबी चर्चा चली। आज गृह मंत्री अमित शाह ने इस प्रस्ताव को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और विपक्ष और राहुल गाँधी पर हमला बोला, उन्होंने कहा कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खेदजनक प्रस्ताव है जो  4 दशकों के बाद किसी स्पीकर के खिलाफ लाया गया है।

गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ संकल्प लाने को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि विपक्षी दलों ने बिरला की निष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं, जो बहुत अफसोसजनक है। उन्होंने सदन में विपक्ष के संकल्प पर चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि किसी को भी नियम के विपरीत बोलने का अधिकार नहीं है। शाह ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी दावा करते हैं कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जाता, जबकि ”वह खुद बोलना नहीं चाहते।

उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा लाए गए विधेयकों का उल्लेख करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने विधेयकों पर चर्चा में भाग नहीं लिया। उन्होंने दावा किया कि वह (राहुल) पिछले साल शीतकालीन सत्र के दौरान जर्मनी की यात्रा पर थे। शाह ने कहा, ”जब-जब महत्वपूर्ण सत्र होता है, उनका विदेश दौरा होता है। जब आप विदेश में हैं तो आप कैसे बोलेंगे। यहां वीडियो कांफ्रेंस का प्रावधान नहीं है। अगर ऐसा प्रावधान होता तो उन्हें बोलने का मौका दे देते।

उन्होंने कहा, ”विपक्ष जब अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल खड़ा करता है तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और निंदनीय भी है। यह हमारी परंपरा, उच्च परंपराओं के निर्वहन में बहुत अफसोसजनक घटना है।” शाह ने कहा, ”लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर असहमति हो सकती है, लेकिन उनका निर्णय अंतिम होता है।” उन्होंने कहा कि विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल उठाया है।

गृह मंत्री ने कहा, ”जब सदन के मुखिया की निष्ठा पर सवाल उठाया जाता है तो दुनिया में भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की साख पर सवाल खड़े हो जाते हैं।” शाह ने कहा कि बजट सत्र के पिछले चरण में लोकसभा अध्यक्ष के चैम्बर में ऐसा माहौल खड़ा किया गया कि अध्यक्ष की सुरक्षा की चिंता पैदा हो गई थी।

उन्होंने कहा कि अगर सदन के नियमों के खिलाफ कोई बोलता है तो लोकसभा अध्यक्ष को उसे रोकने और बाहर निकालने का अधिकार है। उन्होंने कहा, ”75 साल से इन दोनों सदनों ने हमारे लोकतंत्र की नींव को पाताल से भी गहरा किया है, लेकिन आज विपक्ष ने इस साख पर एक प्रकार से सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

सदन आपसी विश्वास से चलता है। पक्ष और विपक्ष, दोनों के लिए सदन के अध्यक्ष संरक्षक होते हैं। इसलिए नियम बनाये गए हैं। यह सदन कोई मेला नहीं है। यहां नियमों के अनुसार चलना पड़ता है।” गृह मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जिन तौर-तरीके को सदन के नियम अनुमति नहीं देते, उस तरह से बोलने का किसी को अधिकार नहीं है, चाहे वह कोई भी हो।

शाह ने कहा, ”हम भी विपक्ष में रहे हैं, तीन बार लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, लेकिन भारतीय जनता पार्टी और राजग ने विपक्ष में रहते हुए कभी भी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया। हमने अध्यक्ष पद की गरिमा को संरक्षित करने का काम किया है।” उनका कहना था, ”किसी के सलहाकार सामाजिक कार्यकर्ता हो सकते हैं, किसी के सलाहकार आंदोलनकारी हो सकते हैं, मगर आंदोलन और कार्यकर्ता को सदन में इसके नियमों के अनुसार ही चलना पडे़गा, क्योंकि यहां नियम बनाए गए हैं।” शाह ने कहा, ”विशेषाधिकार के मुगालते में जो लोग जीते हैं उनको उनकी पार्टी और जनता भी संरक्षण नहीं देती… इसलिए वे छोटे होते जा रहे हैं।

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