
Iran के मिसाइल और ड्रोन हमलों से खाड़ी देशों में हड़कंप, UAE और Saudi Arabia ने कई हमले नाकाम किए, तेल बाजार में भारी उछाल
मध्य पूर्व में जारी तनाव अब जबरदस्त सैन्य टकराव की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन हमलों के कारण संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और बहरीन समेत कई खाड़ी देशों में सुरक्षा स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। कई जगहों पर विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं, तेल प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा और तेल की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया। इस बीच कई देशों ने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चेतावनी जारी की है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति की अपील भी तेज हो गई है।
संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि देश की वायु रक्षा प्रणाली लगातार ईरान से आने वाली मिसाइल और ड्रोन खतरों का सामना कर रही है। मंत्रालय के अनुसार अब तक 17 बैलिस्टिक मिसाइलों का पता चला जिनमें से 16 को हवा में ही नष्ट कर दिया गया, जबकि एक मिसाइल समुद्र में गिर गई। इसके अलावा 117 मानवरहित हवाई यान यानी ड्रोन भी पकड़े गए जिनमें से 113 को मार गिराया गया, जबकि चार ड्रोन देश की सीमा के भीतर गिरे।
यूएई के रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार ईरानी हमलों की शुरुआत से अब तक कुल 238 बैलिस्टिक मिसाइलें पहचानी गईं। इनमें से 221 को नष्ट कर दिया गया, पंद्रह समुद्र में गिरीं और दो देश के भीतर गिरीं। इसी तरह 1422 ड्रोन का पता चला जिनमें से 1342 को रोक लिया गया, जबकि 80 देश की सीमा के भीतर गिरे। आठ क्रूज मिसाइलों को भी वायु रक्षा प्रणाली ने नष्ट कर दिया।
उधर, यूएई के कई शहरों में विस्फोट जैसी आवाजें सुनी गईं जो दरअसल वायु रक्षा प्रणाली द्वारा मिसाइल और ड्रोन को मार गिराने के कारण उत्पन्न हुईं। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और केवल सरकारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। कुछ जगहों पर गिरते मलबे से मामूली नुकसान की भी खबर है।
इस बीच यूएई के फुजैरा क्षेत्र में एक तेल सुविधा केंद्र में आग लगने की घटना सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार यह आग एक हमले के बाद लगी। फुजैरा यूएई के सात अमीरात में से एक है और यहां ऊर्जा से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं स्थित हैं। हमले के बाद वहां से धुएं का बड़ा गुबार उठता देखा गया।
ड्रोन हमलों के कारण यूएई में चार लोगों की मौत भी हुई है। मृतकों में पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के नागरिक शामिल बताए गए हैं। इससे क्षेत्र में काम कर रहे विदेशी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
सऊदी अरब ने भी अपने क्षेत्र में ड्रोन हमले को नाकाम करने का दावा किया है। सऊदी रक्षा बलों ने अल जौफ के पूर्वी इलाके की ओर बढ़ रहे एक ड्रोन को मार गिराया। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने ईरान के हमलों को निंदनीय और अनुचित बताया है। मंत्रालय ने कहा है कि खाड़ी सहयोग परिषद के देशों और अन्य मित्र देशों के खिलाफ किसी भी प्रकार का हमला स्वीकार नहीं किया जाएगा और सऊदी अरब अपने नागरिकों और क्षेत्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार रखता है।
उधर, बहरीन में भी हालात तनावपूर्ण हैं। वहां की प्रमुख तेल कंपनी बापको एनर्जी ने अपने परिचालन पर फोर्स मेजर लागू करने की घोषणा की है। इसका अर्थ है कि असाधारण परिस्थितियों के कारण कंपनी फिलहाल अपने आपूर्ति दायित्वों को पूरा करने के लिए बाध्य नहीं होगी। रिपोर्ट के अनुसार बहरीन के सितरा क्षेत्र में ईरानी ड्रोन हमले के बाद बापको की तेल रिफाइनरी के पास घना धुआं देखा गया और वहां कुछ लोगों के घायल होने तथा ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबर है।
इधर इस बढ़ते संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है। तेल की कीमतों में एक ही दिन में 25 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई है जो कई वर्षों में सबसे बड़ा उछाल माना जा रहा है। बाजार में चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि यह संकट होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास फैल रहा है, जहां से दुनिया की लगभग पांचवां हिस्सा तेल आपूर्ति गुजरती है। जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और सुरक्षा जोखिम बढ़ने से विशेष रूप से एशियाई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
इस बीच, चीन ने भी तनाव कम करने की कोशिश शुरू की है। मध्य पूर्व मामलों के लिए चीन के विशेष दूत सऊदी अरब पहुंचे और वहां के विदेश मंत्री से मुलाकात कर क्षेत्रीय तनाव पर चिंता व्यक्त की। चीन ने नागरिकों और गैर सैन्य ठिकानों पर हमलों की निंदा करते हुए तत्काल सैन्य कार्रवाइयों को रोकने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।
उधर, इजरायल ने भी ईरान के अंदर कई ठिकानों पर नए हमले करने का दावा किया है। इजराइली सेना के अनुसार इन हमलों में मिसाइल प्रक्षेपण स्थलों और रॉकेट इंजन निर्माण इकाइयों को निशाना बनाया गया है।
वहीं, भारत ने भी इस संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में कहा कि भारत शांति, संवाद और कूटनीति के माध्यम से समाधान का समर्थन करता है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।



