उत्तर प्रदेश

हाईकोर्ट ने डीजीपी को चार आईपीएस अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई करने का दिया निर्देश

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चेन्नई के मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को मजिस्ट्रेट के समक्ष एक मामले में ‘क्लोजर रिपोर्ट’ दाखिल करने में विफल रहने पर चार आईपीएस अधिकारियों और तमिलनाडु के एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति पी वेलमुरुगन ने डीजीपी को विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया। हाल में एक आदेश में न्यायमूर्ति वेलमुरुगन ने विजयरानी की याचिका का निपटारा करते हुए यह निर्देश दिया। याचिकाकर्ता ने कुड्डालोर पुलिस को एक मामले में अंतिम रिपोर्ट दायर करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। जब मामला पहले सुनवाई के लिए आया तो सरकारी वकील ने उच्च न्यायालय को बताया कि उक्त मामले की जांच 2017 में ही बंद कर दी गई थी। अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने कहा कि पुलिस ने दावा किया है कि मामला 2017 में बंद कर दिया गया था, लेकिन ‘क्लोजर रिपोर्ट’ क्षेत्राधिकार मजिस्ट्रेट को प्रस्तुत नहीं की गई थी।

उच्च न्यायालय ने कहा कि वरिष्ठ पर्यवेक्षी अधिकारी होने के नाते पुलिस अधीक्षकों का कर्तव्य था कि वे निगरानी रखें। उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर पांचों अधिकारियों ने उचित निरीक्षण किया होता, तो वे लंबे समय से चली आ रही निष्क्रियता का पता लगा लेते और यह सुनिश्चित कर लेते कि ‘क्लोजर रिपोर्ट मजिस्ट्रेट के समक्ष विधिवत दाखिल की जाए और शिकायतकर्ता को भी इसकी सूचना दी जाए। उसने कहा कि ऐसा न करना उनके कर्तव्य के प्रति स्पष्ट लापरवाही को दर्शाता है और पर्यवेक्षी उत्तरदायित्व में गंभीर चूक का प्रतीक है।

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