धार्मिक

रमजान के दौरान ऐसे करें बेसहारों की मदद, मिलेगा खुदा की महर

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रमजान के दौरान शिया व सुन्नी हेल्पलाइन पर रोजेदारों की धर्म से जुड़ी शंकाओं के समाधान का सिलसिला जारी है। रोजेदार धर्मगुरुओं से फितरा, जकात और एतिफाक के बारे में सवाल पूछ रहे हैं। कार्यालय आयतुल्लाह अल उज़मा सैयद सादिक़ हुसैनी शिराज़ी की ओर से जारी हेल्पलाइन पर मौलाना सैयद सैफ अब्बास नक़वी सवालों के जवाब दे रहे हैं जबकि इस्लामिक सेंटर ऑफ़ इंडिया की तरफ से दारुल निजामिया फिरंगीमहल से मौलाना खालिद रशीद फिरंगीमहली की अध्यक्षता में गठित धर्मगुरुओं का पैनल सवालों के जवाब दे रहा है।

हेल्पलाइन पर एक सवाल आया कि क्या फोटोग्राफर के लिए शादी की ऐसी पार्टियों का निमंत्रण स्वीकार करना जायज है जहां शराब पी जाती हो? जवाब में कहा गया कि शराब और इस तरह की दूसरी पार्टियों में फोटो खींचना जायज नहीं है।

एक सवाल पूछा गया कि महिलाओं की आदत होती है कि वे कपड़े और जेवर ज्यादा से ज्यादा जमा करके रखती हैं, क्या इन चीजों पर खुम्स देना वाजिब है? जवाब में बताया गया कि महिला उतना कपड़ा और जेवर जमा कर सकती है जो उसकी हैसियत और शान के मुताबिक हो। अगर वह उससे ज्यादा जमा कर लेती है और वह चीजें साल भर तक बाकी रहें तो अतिरिक्त मात्रा पर खुम्स वाजिब है।

एक रोजेदार ने पूछा कि एतिफाक किन अवसरों पर किया जाना चाहिए? जवाब में बताया गया कि एतिफाक करने के लिए वह अवसर सही है जब इंसान रोजा रख सकता हो, क्योंकि एतिफाक के लिए रोजे से होना जरूरी है। एतिफाक से जुड़ा एक अन्य सवाल आया कि क्या पत्नी के लिए जरूरी है कि वह एतिफाक से पहले पति की अनुमति ले? जवाब में बताया गया कि एतिफाक में व्यस्त होने से पहले हर उस व्यक्ति के लिए अनुमति प्राप्त करना जरूरी है, जैसे गुलाम मालिक से, पत्नी पति से और संतान माता-पिता से।

एक रोजेदार ने एतिफाक के शरई हैसियत पूछी और यह जानना चाहा कि एतिफाक किसे करना चाहिए? जवाब में बताया गया कि एतिफाक मोहल्ला के तमाम लोगों की जिम्मेदारी है लेकिन एक आदमी भी ऐतिफाक कर ले तो सबकी तरफ से काफी होगा।

हेल्पलाइन में पूछा गया कि शबे कद्र में कौन सी इबादत करनी चाहिए? जवाब में बताया गया कि कुरान की तिलावत की जाए। बेहतर यह है कि जो नमाज़ जिन्दगी में छूट गयी हो वह अदा की जाए और ज्यादा से ज़्यादा दुआ मांगी जाए।

एक रोजेदार ने पूछा कि रोजे के फिदया (बदला) की मात्रा क्या है। जवाब में बताया गया कि एक 1692 ग्राम गेहूं दिया जाए या फिर किसी गरीब को दो वक्त भरपेट खाना खिलाया जाए।

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