
UGC नियमावली पर डॉक्टरों में आक्रोश, कहा – इलाज के समय हम नहीं देखते किसी की जाति
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में आज डॉक्टरो ने प्रदर्शन किया है। उनका यह प्रदर्शन यूजीसी बिल को लेकर रहा है। दरअसल, UGC के नए नियमों को लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों और संकाय सदस्यों में भारी आक्रोश है।
यही आक्रोश किंग जांच चिकित्सा विश्वविद्यालय में भी देखने को मिला है। यहां कुलपति कार्यालय के सामने भारी तादाद में शिक्षकों, रेजिडेंट और कर्मचारियों ने मिलकर प्रदर्शन किया है, यह प्रदर्शन यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने को लेकर रहा है।
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का मानना है कि यह नीति कैंपस में जाति-आधारित भेदभाव को कम करने के बजाय बढ़ावा देने वाली हो सकती है, ऐसे में इसको सरकार को वापस लेना ही पड़ेगा। नहीं तो व्यवस्था पूरी तरह से खराब हो सकती है।
डॉ. समीर मिश्रा ने कहा है कि इस बिल से तो यह पता चल रहा है कि पहले से ही तय कर दिया गया है कि सामान्य वर्ग का शख्स अत्याचार करेगा ही करेगा। इस बिल में सामान्य वर्ग को कहीं जगह ही नहीं मिली है। ऐसे में इस बिल को वापस लेना चाहिए। साथ ही यदि शिक्षा संस्थानों के लिए कोई कानून बनाना है तो उसमें वहां के शिक्षक और कर्मचारियों को भी साथ लेकर कानून बनाना चाहिए।
वहीं केजीएमयू शिक्षक संघ के महासचिव डॉ. संतोष कुमार ने कहा है कि हिन्दू राष्ट्र निर्माण के संकल्प हेतु यदि जातिगत भेदभाव करने की मंशा नहीं है और सरकार पर विश्वास है, तो यूजीसी द्वारा जारी “उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु विनियम, 2026” का विरोध करने का कोई औचित्य नहीं है। जहाँ तक सवर्णों को कानून का दुरुपयोग एवं झूठी शिकायत का डर है, उसके लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा-217 में कठोर दण्ड का प्रावधान है।



