धार्मिक

गंगा के पानी का रंग बदलने से साधु-संतों में नाराजगी

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महाकुंभ के ग्यारहवें दिन गंगा के पानी में तेजी से बदलावा हुआ है। पहले पानी का रंग हल्का मटमैला था, लेकिन अब यह पानी काले रंग का होता जा रहा है। महाकुंभ में कल्पवास कर रहे 13 अखाड़ा सहित साधु-संत, महात्मा कुछ भी कह पाने में असमर्थ हैं। जबकि, झूंसी के टीकरमाफी आश्रम के परमहंस स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी महाराज का कहना है कि बीते तीन दिन से गंगा का पानी काला है, अधिकारियों का ध्यान इस तरफ नहीं है। वहीं, महाकुंभ के मेलाधिकारी विजय किरन आनन्द का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।

दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाकुंभ में गंगा में पानी के पर्याप्त उपलब्धता के मामले की स्वयं मानीटरिंग कर रहे हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री ने अपनी कैबिनेट में शामिल मंत्रियों के साथ संगम में अमृत स्नान किया था। जबकि, तीन दिन से गंगा के पानी का रंग बदल रहा है। पहले यह पानी मटमैला था, लेकिन अब गंगा का पानी काला हो रहा है। स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी महाराज का कहना है कि प्रयागराज से लेकर उत्तराखंड तक न तो नाले बंद किए गये हैं, न की मिलों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी हुई है। ऐसे में गंगा का पानी कैसे साफ रहेगा। बताया कि मुझे जानकारी है कि नरौरा बांध से जो पानी छोड़ गया है।

वह कासगंज समेत अन्य शहरों में लिफ्ट हो रहा है, लेकिन संगम तक नहीं आ रहा है। कहाकि, नरौरा से 200 एमएलडी गंदा पानी, फिरोजाबाद के चूड़ी मिल का पानी, पाण्डव नदी का गंदा पानी, कानपुर के जाजमऊ का 400 एमएलडी गंदा पानी, रामगंगा शुगर मिल व गजरौला के 30 मिल का पानी और प्रयागराज के नालो का पानी गंगा में गिर रहा है, जिससे गंगा प्रदूषित हो रही है। उनका कहना है कि पानी के बदलते स्वरूप पर शासन-प्रशासन बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। गंगा में डुबकी लगाने वाले करोड़ो श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए बल्कि गंगा में पर्याप्त स्वच्छ जल मुहैया करवाया जाए।

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