एडीटोरियल

Criminals और भगोड़ों की शरणस्थली बना लन्दन

नहीं आयेगी, क्यों आये? कोई उसका क्या कर लेगा? एक समय था कि ब्रिटिश राज्य का सूर्य नहीं डूबता था। आज यह समय है कि यदि वह अपने देश में दुनियाभर के Criminals को ठिकाना उपलब्ध ना कराये और उनकी सुख-सुविधा का ख्याल ना रखे तो उसके यहॉं सवेरा ना हो। वह भूखों मरने लगें।

Financial-FRAUD
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भूखों मरने से अच्छा है कि ऐसे Criminals को ही पनाह दी जाये जो हमारे जीवन का साथी बने। इसीलिए वह ऐसे अपराधियों, विशेषतौर पर आर्थिक अपराध करने वालों को शरण देता है। और हमारी सरकार की भी मजबूरी है, ऐसे अपराधियों को तड़ी पार कराना। क्योंकि ये जाते-जाते भी बहुत कुछ दे जाते हैं।

फिर इनके द्वारा जो आर्थिक अपराध किये गये होते हैं, वो बैंकों से ही किये गये होते हैं। इसलिए पैसा तो गरीबों का होता है, जिसको राहत देने के नाम पर सरकार लाखों करोड़ का फण्ड इन बैंकों को मजबूत करने के नाम पर मुहैय्या करा देती है।

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