भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रमाणों के साथ दुनिया तक पहुंचाएं… गोरखपुर में बोले सीएम योगी- नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ना जरूरी
गोरखपुर। मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने भारत के वैभव के साथ उसकी ज्ञान परंपरा को भी नष्ट करने का प्रयास किया। ब्रिटिश काल में इसका तरीका बदला और भारतीयों को उनकी भाषा, परंपराओं, मूल्यों और जड़ों से दूर करने की कोशिश हुई। अब भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रमाणों के साथ दुनिया के सामने रखने और आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने का समय है।
मुख्यमंत्री गुरुवार को गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन में महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित ‘भारतीय ज्ञान परंपरा का वर्तमान परिप्रेक्ष्य’ सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे थे।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा भाषा, व्याकरण, अर्थशास्त्र, विज्ञान, खगोल, आयुर्वेद, ज्योतिष और शिल्प सहित अनेक क्षेत्रों में समृद्ध रही है। तक्षशिला, नालंदा, काशी, उज्जैन और कांची जैसे केंद्र ज्ञान के प्रमुख केंद्र रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को पाणिनि, पतंजलि, आयुर्वेदाचार्यों और चाणक्य जैसी महान परंपरा से परिचित कराना जरूरी है।
प्रमाणों के साथ सामने आए भारतीय ज्ञान
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले तथ्यों का प्रमाणित होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से भ्रम और दुष्प्रचार को दूर किया जा सकता है। योगी ने पांडुलिपियों, शिलालेखों और ताम्रपत्रों के संरक्षण के साथ उनके डिजिटाइजेशन पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, काशी में एक लाख से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटाइजेशन का कार्य चल रहा है।
योग और आयुष को मिली वैश्विक पहचान
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से योग और आयुष जैसी भारतीय परंपराओं को वैश्विक पहचान मिली है। उन्होंने शिक्षण संस्थानों से भारतीय ज्ञान धरोहर के संरक्षण और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने का आह्वान किया। सम्मेलन में जगद्गुरु विश्वेश प्रपन्नाचार्य, जगद्गुरु श्रीधराचार्य, आईआईटी बीएचयू के प्रो. वी. रामनाथन और प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने भी भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और आधुनिक संदर्भ में उसके उपयोग पर विचार रखे।



