
Super 8 में Team India की हार पर मंथन, खराब Strategy से लेकर Playing XI पर उठे गंभीर सवाल
अहमदाबाद में खेले गए सुपर 8 मुकाबले के बाद भारतीय खेमे में आत्ममंथन का दौर शुरू हो गया है। 188 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम 111 पर सिमट गई और 76 रन से हार झेलनी पड़ी। इस हार ने सिर्फ नेट रन रेट को -3.800 तक नहीं गिराया, बल्कि टीम चयन और रणनीति पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह रहा कि अक्षर पटेल जैसे उपयोगी ऑलराउंडर को प्लेइंग इलेवन से बाहर क्यों रखा गया। हालांकि यह अकेला कारण नहीं था। मैदान पर 11 खिलाड़ी मौजूद थे, लेकिन फैसलों और शॉट चयन में समझदारी की कमी साफ दिखी।
दक्षिण अफ्रीका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी और पावरप्ले में 20 रन पर तीन विकेट गंवा दिए थे। इसके बावजूद डेविड मिलर ने 35 गेंदों पर 63 रन की पारी खेलकर मैच का रुख बदल दिया। उनके साथ डेवॉल्ड ब्रेविस ने संयम और आक्रामकता का संतुलन दिखाया। दोनों के बीच 97 रन की साझेदारी ने टीम को 187 तक पहुंचाया।
भारत की पारी की शुरुआत में ही झटका लगा जब एडेन मार्करम की ऑफ स्पिन पर ईशान किशन बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में आउट हो गए। मौजूद जानकारी के अनुसार इस टूर्नामेंट में भारत के 12 विकेट दाएं हाथ के ऑफ स्पिनरों ने लिए हैं और उनमें से अधिकांश पार्ट-टाइम गेंदबाज रहे हैं। यह आंकड़ा लापरवाही की ओर इशारा करता है।
तिलक वर्मा से उम्मीद थी कि वह पारी संभालेंगे, लेकिन उन्होंने भी जल्दबाजी दिखाई। अनुभवी बल्लेबाजों से उम्मीद थी कि वे साझेदारी बनाकर दबाव कम करेंगे, मगर लगातार बड़े शॉट की कोशिश ने हालात बिगाड़ दिए। कप्तान सूर्यकुमार यादव और बाद में हार्दिक पांड्या भी परिस्थिति के अनुरूप संयम नहीं दिखा सके।
मध्यक्रम के विफल होने के बाद निचला क्रम ज्यादा देर टिक नहीं पाया। टीम 18.5 ओवर में ऑलआउट हो गई। सहायक कोच ने स्वीकार किया कि टीम ने बड़े स्तर पर गलतियां की हैं और सुधार की जरूरत है।
अब स्थिति यह है कि सेमीफाइनल की उम्मीद जिंदा रखने के लिए भारत को अपने अगले दोनों मैच बड़े अंतर से जीतने होंगे। साथ ही अन्य नतीजों पर भी नजर रहेगी। यह हार सिर्फ स्कोरबोर्ड पर नहीं, बल्कि रणनीतिक सोच और मैच जागरूकता की कमी को भी उजागर करती है। आगे का रास्ता कठिन जरूर है, लेकिन वापसी की संभावना अभी भी बाकी है।



