Thursday, November 5 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
डबल इंजन सरकार पर प्रियंका का वार, कहा- वादे बड़े-बड़े, जमीनी हकीकत सिर्फ जुमला
राजकीय नर्सेस संघ मनायेगा काला दिवस : सहमति के बाद भी शासनादेश नहीं, यूपी में नर्सेस का फूटा गुस्सा
Ranji Trophy में Karnataka की एक पारी और 314 रन से जीत UP और Jharkhand मजबूत
Chef Kapil Sikaddar की अनोखी Recipe: दिवाली पर बनाएं Sesame Nut Royal Bars और मलाई स्टफ्ड क्रिस्पी रागी रोल
Diwali 2026 पर अपनी बेटी को दें फेस्टिव लुक, चुनें Ethnic Jumpsuit और Indo Western Suit
धनतेरस पूजा पर पहनें Yellow and Gold Ethnic Sets, मिलेगा अट्रैक्टिव और रॉयल लुक
ट्रंप और नेतन्याहू दोस्ती में इसराइल के लिए ईरान में इस्लामिक रेवोल्यूशन को पलटने के लिए निकले थे और फरवरी के आखिर में हमला भी किया। ईरानी सुप्रीम लीडर को भी मार दिया। लेकिन ईरान में इस्लामिक रेवोल्यूशन ज्यों का त्यों है। मगर सिर्फ 9 माह बाद पीएम नेतन्याहू सत्ता तक नहीं पहुंच पाए। वहां मुसलमानों की अरब पार्टियां सत्ता की चाबी ले गई और इधर अमेरिका में ट्रंप के हाथ से पावर निकल गया। वो वीटो पावर का डर जरूर दिखा रहे हैं लेकिन ईरान से पंगा लेना ही उनकी पार्टी को मिड टर्म इलेक्शन में खा गया। ट्रंप ने तो उस वक्त ईरान के लोगों से कहा था कि वह अपनी सरकार पर कब्जा कर लें। नेतन्याहू भी लगातार ईरान की मौजूदा व्यवस्था को खत्म करने की बात करते रहे। लेकिन दोनों की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। अयातुल्लाह अली खामनेई की मौत के बावजूद ईरान नहीं हिला। इसराइल और अमेरिका की सत्ता जरूर हिल गई। इसराइल और अमेरिका की जनता इसी सवाल के साथ वोट देने पहुंची थी कि हमें जंग में क्यों झोंका? हम पर महंगाई का बोझ क्यों थोपा और उसका असर चुनावी नतीजों के तौर पर साफ दिखा। जनवरी 2026 के ईरान के महंगाई विरोधी प्रदर्शनों को ट्रंप ने सत्ता परिवर्तन के मौके के रूप में देखा था। उनकी सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए ईरानी अधिकारियों को निशाना बनाने पर विचार किया। जंग तक कर डाली। वह भी 40 दिनों तक। हासिल सिर्फ हार हुई। मिडिल ईस्ट में अमेरिका के पैर उखड़ गए। इसराइल में नेतन्याहू की पार्टी इख्तदार में नहीं आ रही है और ट्रंप की ताकत भी चली गई। अब 2 साल जैसे तैसे चलेगा अमेरिका का निजाम मचेगी खूब खींचतान। डेमोक्रेट्स की कांग्रेस और सीनेट जंग के लिए बजट ही जारी नहीं करेगी तो लड़ेंगे किससे और कैसे? जंग के दौरान ट्रंप और नेतन्याहू ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन तो किया लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आया कि किसी देश के नेता को मार डालना और उसकी पूरी राजनीतिक व्यवस्था को बदल देना दो अलग-अलग बातें हैं। ईरान में सत्ता का आधार सिर्फ खामने ही नहीं बल्कि धार्मिक संस्थाओं, सुरक्षा बलों और ताकतवर इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉप्स यानी पांच दारा इस्लाम का पूरा नेटवर्क है। यही वजह रही कि ईरान के नेतृत्व को तो खत्म कर दिया गया लेकिन वहां के निजाम को नहीं बदला जा सका। दूसरी तरफ युद्ध की कीमत, आर्थिक दबाव और सियासी फैसलों को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू को अपने ही देशों में सवालों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका में ट्रंप की हार पर ईरान ने सिर्फ इतना ही कहा है कि अंतरात्मा की आवाज हो या महंगाई का बोझ अमेरिकियों ने जंग के खिलाफ वोट किया है। हम उनके इस संदेश का समर्थन करते हैं। अगर अमेरिकी सरकार अपने अंतरराष्ट्रीय आकाओं और ब्लैकमेल करने वालों के हितों की सेवा के लिए अपने ही नागरिकों की इच्छा के साथ विश्वासघात करती है तो उसे इसका खौफनाक अंजाम भुगतना पड़ेगा जिसे वह कभी नहीं भूल पाएगी।
चले थे ईरान की रिजीम बदलने, चुनाव में ट्रंप और नेतन्याहू दोनों पिटे
VETO…अब ट्रंप क्या नया करने वाले हैं? मिडटर्म नतीजों के बाद अपने पोस्ट में बढ़ाई हलचल
पहले ODI मैच से पूर्व Shubman Gill, Virat Kohli और Rohit Sharma को मिली विशेष Rugby जर्सी
Search for
Switch skin
Log In
Follow
Facebook
Twitter
LinkedIn
YouTube
Instagram
RSS
Menu
Search for
होम
राज्य
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड
दिल्ली
पंजाब
मध्यप्रदेश
पश्चिम बंगाल
हरियाणा
भारत
राष्ट्रीय
राजनीति
विश्व
खेल-खिलाड़ी
क्रिकेट
कारोबार
मनोरंजन
सनातन
ज्योतिष
लाइफस्टाइल
एडीटोरियल
अन्य
ENGLISH CHANNEL
एनालिसिस
धोखा-धड़ी
जन संसद
जनता जर्नादन
सत्ता पक्ष
साइबर संवाद
देशभक्त
पंचतंत्र
वन्दे मातरम
साइंस & टेक्नोलॉजी
ऑटो
ट्रिगर न्यूज
खबर
विशेष
वायरल वीडियोज़
Lucknow
20
℃
Home
/
Bhagat Singh अमर शहीद भाग-एक
/
Bhagat Singh
Bhagat Singh
Back to top button
mahjong ways
slot777
Close
Search for
Close
Search for
Close
Log In
Forget?
Remember me
Log In