योगी सरकार अगले महीने पांचवीं ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की तैयारी में जुट गई है। अबतक के समारोहों में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निवेश वाली 16 हजार से अधिक परियोजनाओं का भूमिपूजन हो चुका है। यह निवेश के नए युग का आगाज है। एमओयू से ग्राउंड ब्रेकिंग तक ऐतिहासिक प्रगति और रिकॉर्ड निवेश से यहां औद्योगिक आधार बेहद मजबूत हुआ है। कभी निवेशकों के लिए अविश्वसनीय माना जाने वाला प्रदेश आज देश का सबसे भरोसेमंद और आकर्षक निवेश गंतव्य बनकर उभरा है।
सबसे महत्वपूर्ण यह है कि विकास का यह मॉडल केवल पश्चिमी यूपी तक सीमित नहीं रहा। बुंदेलखंड, पूर्वांचल और तराई क्षेत्रों में औद्योगिक पार्कों और निवेश परियोजनाओं ने क्षेत्रीय संतुलन को मजबूती दी है। यूपी दिवस के अवसर पर यह साफ है कि प्रदेश अब बीते कल की चुनौतियों में नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं में जी रहा है। मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, सख्त प्रशासन और स्पष्ट विजन के साथ प्रदेश भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने को तैयार है।
वर्ष 2018 की पहली इन्वेस्टर्स समिट से लेकर 2023 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तक योगी सरकार ने निवेश को सिर्फ एमओयू तक सीमित नहीं रखा, बल्कि मजबूत ग्राउंड ब्रेकिंग और क्रियान्वयन मॉडल के जरिए उसे धरातल पर उतारा। प्रदेश में अब तक 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली 16 हजार से ज्यादा परियोजनाओं का शिलान्यास हो चुका है। इनमें से 8,300 से अधिक परियोजनाएं व्यावसायिक रूप से संचालित होकर लाखों युवाओं को रोजगार दे रही हैं।
सरकार के योजनाबद्ध प्रयासों का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, लेदर, फूड प्रोसेसिंग, फार्मा और लॉजिस्टिक्स जैसे विविध क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश के 65 प्रतिशत से अधिक मोबाइल फोन का निर्माण उत्तर प्रदेश में हो रहा है, जबकि नोएडा और लखनऊ जैसे शहर उभरते टेक हब बन चुके हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और गति शक्ति से मिली विकास को रफ्तार
प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ प्रदेश ने योजना, भूमि उपयोग और परियोजना क्रियान्वयन को एकीकृत किया। एक्सप्रेसवे-आधारित औद्योगिक क्लस्टर, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब, ट्रांस-गंगा सिटी और ग्रेटर नोएडा निवेश क्षेत्र ने राज्य को इंफ्रास्ट्रक्चर-ड्रिवन इकोनॉमी की दिशा में अग्रसर किया। जिला स्तर तक डेटा-आधारित योजना आज प्रदेश की पहचान बन चुकी है।
उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर, ब्रह्मोस इंटीग्रेशन सुविधा, अदानी डिफेंस जैसी मेगा यूनिट्स ने राज्य को राष्ट्रीय सुरक्षा उत्पादन का केंद्र बनाया। वहीं डेटा सेंटर नीति, आईटी-आईटीईएस विस्तार और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के जरिए उत्तर प्रदेश डिजिटल और नॉलेज इकॉनमी का नया हब बन रहा है। यह बदलाव केवल निवेश नहीं, बल्कि भविष्य की नौकरियों और तकनीकी नेतृत्व का आधार है।
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