धोखा-धड़ी

Aadhar की जानकारी सार्वजनिक करना धोखाधड़ी है

ऐसा किसके आदेश और किस उददेश्य की पूर्ति के लिए कर रही है। कोई भी पूछने वाला नहीं है। क्या भारत सरकार के किसी भी विभाग को इसकी जानकारी नहीं है?

इन सरकारी विभागों को प्रताड़ित किया जाना चाहिए, जिन्होंने Aadhar की जानकारियों को सार्वजनिक किया। यह जनता के साथ धोखा है अथवा नहीं?

यूआईडीएआई का यह कहना कि आम जनता की सूचना के लिए आधार की जानकारियों को सरकारी विभागों द्वारा सार्वजनिक कर दिया गया। निहायत ही धोखाधड़ी वाला कृ्त्य है, जिसमें यूआईडीएआई की भी संलिप्तता नज़र आती है।

क्या यह प्राईवेसी को बगैर उस नागरिक की सहमति एवं बिना जोर जबरदस्ती के सार्वजनिक किया जाना अपराध की श्रेणी में नहीं लाता। कोई और अपराध बनता है या नहीं, लेकिन प्राईवेसी को सार्वजनिक किये जाने का अपराध तो निश्चित तौर पर बनता है।

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