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कुतुबमीनार मामले में 24 अगस्त के लिए अदालत ने टाला आदेश

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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ऐतिहासिक इमारत कुतुब मीनार के परिसर में रखी मूर्तियों की पूजा को लेकर दिल्ली की साकेत कोर्ट आज अपना फैसला सुनाने वाली थी। लेकिन दिल्ली की साकेत कोर्ट ने कुतुब मीनार परिसर के अंदर हिंदू और जैन लोगों के पूजा की अनुमति मांगने वाली अपीलों पर अपने आदेश की घोषणा को टाल दिया है।

अदालत ने अपने आदेश को 24 अगस्त के लिए टाल दिया है। बता दें कि साकेत कोर्ट में दायर मुकदमे में दिल्ली की निचली अदालत को कुतुब मीनार परिसर में पूजा की मांग वाली याचिका पर फिर से सुनवाई करने और इस पर पुनर्विचार की मांग की गई है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने अदालत में कुतुब मीनार परिसर के अंदर हिंदू और जैन देवताओं की मूर्तियों को पुर्नस्थापित करने के अनुरोध वाली एक याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह उपासना स्थल नहीं है। और स्मारक की मौजूदा स्थिति को बदला नहीं जा सकता।

एएसआई ने यह भी कहा कि ‘‘केंद्र संरक्षित’’ इस स्मारक में उपासना के मौलिक अधिकार का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति की दलील से सहमत होना कानून के विपरीत होगा। हालांकि, एएसआई ने यह भी कहा कि कुतुब परिसर के निर्माण में हिंदू और जैन देवताओं की स्थापत्य सामग्री और उत्कीर्ण छवियों का पुन: उपयोग किया गया था।

इसके साथ ही कुतुब मीनार परिसर में स्थित मस्जिद में नमाज पढ़े जाने पर रोक लगाने के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। कुतुब मीनार परिसर में मौजूद मस्जिद में नमाज पढ़े जाने पर रोक के भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण (एएसआई) के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।

जिसमें वकील की ओर से कहा गया है कि ये वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। और यहां काफी वक्त से नमाज पढ़ी जा रही है। इसके बावजूद 15 मई को अचानक से भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण की तरफ से नमाज पर रोक लगा दी गई है।

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