US China Agreement: अमेरिका से जाते, ट्रंप को ही बुरा फंसा गया जिनपिंग
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप को जो चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग फूटी आंख नहीं सुहाते थे जो एक दूसरे के कट्टर विरोधी माने जाते रहे हैं। अमेरिका और चीन ऐसे देश हैं जिनके बीच दुनिया की आर्थिक और रणनीतिक ताकत बनने की होड़ मची हुई है। ताइवान जैसे मुद्दा पर दोनों देशों के बीच युद्ध जैसा माहौल बन चुका है। लेकिन फिर भी पलटी मार ट्रंप ने जिनपिंग को अमेरिका बुलाकर उन्हें जो सम्मान दिया उसने पूरी दुनिया को चौंका कर रख दिया। इसके पीछे ट्रंप का स्वार्थ वाला वो प्लान था जिस पर जिनपिंग ने पानी फेर दिया। अमेरिका से जाते-जाते जिनपिंग ट्रंप को ऐसा उलझा गए कि उनका दिमाग भन्नाया हुआ है। ट्रंप ने जिनपिंग को जिस मकसद से अमेरिका बुलाया था और सारे नियम कानून तोड़कर जिनपिंग के स्वागत में पूरी ताकत झोंक दी थी। चाहे बात मिलानिया और ट्रंप के साथ सारे प्रोटोकॉल तोड़कर जिनपिंग के भव्य स्वागत की हो या फिर बात अमेरिकी वायुसेना के ताकतवर लड़ाकू विमानों की ओर से शानदार फ्लाई पास्ट की हो। यानी कि जिनपिंग से अपनी बात मनवाने के लिए ट्रंप ने क्या-क्या नहीं किया। हदोंत पार हो गई। जब ट्रंप ने बाइडन की तस्वीर दिखाकर उनका मजाक उड़ाते हुए जिनपिंग को खुश करने की पूरी कोशिश की। लेकिन फिर भी कुछ काम यह सब नहीं आया बल्कि जिनपिंग जो सोच कर आए थे वही हुआ।
दरअसल ट्रंप और शिजनपिंग के बीच व्यापार ईरान, यूक्रेन, ताइवान और एआई जैसे कई बड़े मुद्दों पर बातचीत हुई। दोनों देशों ने व्यापार तनाव कम करने की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति भी जताई। जबकि कुछ मुद्दों पर मतभेद साफ नजर आए। ट्रंप और जिनपिंग ने अपनी बैठक में ईरान युद्ध पर चर्चा तो की लेकिन दोनों नेताओं ने इस बातचीत की पूरी जानकारी साद्विक नहीं की। ट्रंप चाह रहे थे कि चीन क्षेत्रीय तनाव को कम करने में भूमिका निभाए। लेकिन चीन की भूमिका को लेकर कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ। जिनपिंग ने ट्रंप को एक और बड़ा झटका तब दिया जब उन्होंने अमेरिका के आगे एक लाल रेखा खींच दी। जिसमें जिनपिंग ने साफ कह दिया कि अमेरिका इस लाल रेखा को पार ना करे। वो मुद्दा था ताइवान का। चीन ताइवान के मुद्दे पर कंप्रोमाइज करने को तैयार नहीं है। यानी कि पीछे नहीं हटेगा।
शी जिनपिंग ने साफ-साफ कह दिया कि चीन को उम्मीद है कि अमेरिका ताइवान की आजादी का विरोध करने के सही रूप पर कायम रहेगा और ताइवान के मुद्दे को समझदारी से संभालेगा। इसके अलावा जिनपिंग ने ट्रंप को खड़ा संदेश देते हुए कहा कि चीन और अमेरिका दोनों महान देश हैं। लड़ने से दोनों ही देशों का नुकसान है। हमारा कंपटीशन हेल्दी होना चाहिए। यानी कि जिनपिंग ने ट्रंप को नसीहत दे दी कि लड़ने से तुम्हें कोई फायदा नहीं होने वाला है। दबाव वाला खेल भी हमारे साथ नहीं चलेगा। इसके अलावा ट्रंप और जिनपिंग की बैठक का सबसे बड़ा ठोस नतीजा व्यापार के मोर्चे पर सामने आया। दोनों देशों ने पहले से चल रहे व्यापार युद्ध विराम को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए। हालांकि यह कोई बड़ी नई व्यापार संधि नहीं थी। इसके अलावा ट्रंप को उम्मीद थी कि एआई को लेकर कोई बड़ी बात बनेगी। लेकिन इस पर भी जिनपिंग ने पानी फेर दिया। एआई के नियंत्रण और सुरक्षा नियमों को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेद सामने आए। शी जिनपिंग ने कहा कि अमेरिका और चीन की जिम्मेदारी है कि एआई का विकास इंसानों के नियंत्रण में रहे। इसके उलटन ट्रंप का मानना है कि इस तकनीक पर कोई नया कंट्रोल नहीं लगाया जाना चाहिए।



