रिलायंस अनिल अंबानी समूह के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारी 5 दिन की ईडी हिरासत में लिए गये
दिल्ली की एक अदालत ने कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन के मामले में रिलायंस अनिल अंबानी समूह (आरएएजी) के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को बृहस्पतिवार को पांच दिन के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में भेज दिया। अदालत द्वारा जारी 24 पन्नों के आदेश के अनुसार, ईडी की जांच में यह सामने आया है कि बैंक से लिए गए ऋण की राशि को कथित तौर पर उन मुखौटा कंपनियों में भेजा गया था, जिन पर खुद समूह का नियंत्रण था।
आदेश में कहा गया कि जांच के दौरान ईडी को ईमेल के रूप में जो डिजिटल सबूत मिले हैं, उनसे करोड़ों रुपये के कर्ज की हेराफेरी में दोनों आरोपियों की भूमिका पूरी तरह साफ हो जाती है। जांच एजेंसी ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी के मामले में बृहस्पतिवार को अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना को धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया।
झुनझुनवाला को लंबी पूछताछ के बाद मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया। उन्हें मुंबई की एक विशेष अदालत में पेश किया गया, जहाँ एजेंसी ने आगे की पूछताछ के लिए उनकी कस्टोडियल रिमांड मांगी।
इसी से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में, ED ने Reliance Capital Ltd के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) और मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) अमित बापना को भी गिरफ्तार किया। बापना ने 2008 से 2020 के बीच इन पदों पर काम किया था। ये दोनों ही व्यक्ति उद्योगपति अनिल अंबानी के करीबी सहयोगी माने जाते हैं।
कोर्ट ने एजेंसी की सात दिन की हिरासत की मांग के मुकाबले, मिस्टर झुनझुनवाला और मिस्टर बापना दोनों को पांच दिन की ED हिरासत में भेज दिया है।
एक रेगुलेटरी फाइलिंग में, रिलायंस ADA ग्रुप ने साफ किया कि मिस्टर झुनझुनवाला और मिस्टर बापना दोनों का पिछले सात सालों से ग्रुप से कोई लेना-देना नहीं है। इसमें कहा गया है, “मीडिया के सवालों के आधार पर, रिलायंस ग्रुप यह साफ करता है कि अमिताभ झुनझुनवाला ने सितंबर 2019 में, यानी करीब सात साल पहले ग्रुप छोड़ दिया था। उसके बाद उनका ग्रुप से कोई संबंध नहीं रहा, जिसमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस पावर लिमिटेड भी शामिल हैं। अमित बापना ने दिसंबर 2019 में रिलायंस ग्रुप छोड़ दिया था। उसके बाद उनका ग्रुप से कोई संबंध नहीं रहा, जिसमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर भी शामिल हैं।



