ब्राजील चुनाव में छाया रहा ‘ट्रंप फैक्टर’, किसी उम्मीदवार को स्पष्ट जनादेश नहीं; 25 अक्टूबर को होगा अंतिम फैसला
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में पहले दौर में किसी उम्मीदवार को बहुमत नहीं मिला। अब मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा और सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो के बीच 25 अक्टूबर को दूसरे दौर का मुकाबला होगा। अगला राष्ट्रपति कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होगा। चुनाव प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक, फ्लावियो बोल्सोनारो को 5.6 करोड़ से ज्यादा वोट, जबकि लूला को करीब 5.36 करोड़ वोट मिले। फ्लावियो का प्रदर्शन चुनाव से पहले के ज्यादातर सर्वेक्षणों के अनुमान से बेहतर रहा। पहले दौर में लूला और फ्लावियों के अलावा 10 उम्मीदवार मैदान में थे। अब इन उम्मीदवारों को मिले वोट और उनके समर्थकों का रुख दूसरे दौर में अहम हो सकता है। चुनाव में अपराध, सार्वजनिक सुरक्षा, महंगाई और जीवन-यापन की लागत प्रमुख मुद्दे रहे। महिलाओं के खिलाफ हिंसा भी बड़ा मुद्दद्य रही। चुनावी मतदाताओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 53% है।
फ्लावियो ट्रम्प के करीबी माने जाते हैं और दोनों के बीच इस साल वाइट हाउस में मुलाकात भी हो चुकी है, हालांकि ट्रम्प ने चुनाव में खुला समर्थन करने से अभी परहेज किया है। पर, ट्रम्प के दोबारा अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद लैटिन अमेरिका में अब तक कोई वामपंथी राष्ट्रपति चुनाव नहीं जीत सका है। ऐसे में फ्लावियो की जीत ब्राजील समेत पूरे क्षेत्र में दक्षिणपंथ को बड़ा बढ़ावा देगी, जबकि लूला की जीत ट्रम्प के बढ़ते प्रभाव के बीच लैटिन अमेरिकी लेफ्ट की बड़ी वापसी होगी।
रायटर के अनुसार, बोल्सोनारो की दक्षिणपंथी लिबरल पार्टी रविवार को हुए कांग्रेस चुनावों में सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरी। सीनेट और निचले सदन, दोनों में किसी भी एक पार्टी के मुकाबले सबसे अधिक सीटें हासिल कीं। लिबरल पार्टी की सीनेट में सीटें 15 से बढ़कर 28 हो गईं। 1985 में लोकतंत्र की वापसी के बाद से किसी पार्टी के लिए यह सबसे अच्छा नतीजा था। पार्टी ने निचले सदन में भी 121 सीटें हासिल कीं, जबकि अभी वहां उसके पास 98 सीटें हैं।



