आज विष्णु पूजा से दूर होंगी बाधाएं, अनंत सूत्र का ये है खास महत्व, गणेश प्रतिमाओं का भी होगा विसर्जन
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली अनंत चतुर्दशी का व्रत शुक्रवार को रखा जाएगा। मान्यता है कि अनंत चतुर्दशी पर व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा, व्रत कथा और विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु हल्दी-कुमकुम से पूजित 14 गांठ वाले पीले अनंत सूत्र को भगवान विष्णु को अर्पित करने के बाद धारण करते हैं।
अनंत सूत्र का क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने सृष्टि की शुरुआत में चौदह लोकों की रचना की और उनकी रक्षा के लिए चौदह रूपों में प्रकट हुए। इसी कारण इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूपों की पूजा की जाती है। धन-धान्य, सुख-संपदा और संतान की कामना से भी यह व्रत किया जाता है। गणेश महोत्सव का समापन भी आज होगा। पंडालों में स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमाओं का अनंत चतुर्दशी पर विधि-विधान से विसर्जन किया जाएगा।
शुभ मुहूर्त
चतुर्दशी तिथि 25 सितंबर की रात 11:06 बजे समाप्त होगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और अनंत सूत्र धारण करने की विशेष मान्यता है। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5:56 बजे से रात 11:06 बजे तक रहेगा। वहीं रवियोग सुबह 5:56 बजे से 11:22 बजे तक रहेगा।
गणेश प्रतिमाओं का होगा विसर्जन
अनंत चतुर्दशी के अवसर पर गणेश उत्सव का भी समापन होता है। पिछले कई दिनों से स्थापित गणेश प्रतिमाओं का श्रद्धालु विधि-विधान से पूजन करने के बाद आज विसर्जन करेंगे। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में गणेश प्रतिमा विसर्जन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ गणपति बप्पा को विदाई देंगे।
प्रशासन की ओर से भी विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाते हैं। श्रद्धालुओं से अपील की जाती है कि वे निर्धारित विसर्जन स्थलों का ही इस्तेमाल करें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
अनंत चतुर्दशी पर एक ओर जहां भगवान विष्णु की पूजा और अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा निभाई जाएगी, वहीं दूसरी ओर गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ गणेशोत्सव का समापन होगा। इस दौरान मंदिरों और पूजा स्थलों पर विशेष धार्मिक आयोजन भी किए जाएंगे।



