घर में दुकान खोलने वालों को नहीं लेना होगा अलग बिजली कनेक्शन, कॉमर्शियल अनिवार्यता हो सकती है खत्म
प्रदेश में घर से छोटे व्यवसाय संचालित करने वाले लाखों उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की संभावना है। प्रस्तावित नई बिजली टैरिफ नीति के तहत अब ऐसे लोगों को अलग से कॉमर्शियल बिजली कनेक्शन लेने की अनिवार्यता से छूट दी जा सकती है। राज्य विद्युत नियामक आयोग इस दिशा में गंभीरता से विचार कर रहा है। प्रदेश में कुल करीब 3.5 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें से लगभग 2.94 करोड़ घरेलू कनेक्शनधारी हैं।
अनुमान है कि इनमें से करीब 35 लाख लोग अपने घरों में किराना, स्टेशनरी, सब्जी या अन्य छोटे व्यवसाय चलाते हैं। मौजूदा नियमों के अनुसार, घर में दुकान चलाने पर कॉमर्शियल बिजली कनेक्शन लेना जरूरी होता है। ऐसा न करने पर बिजली चोरी के आरोप में कार्रवाई भी हो सकती है। हालांकि, नई नीति में ऐसे छोटे उपभोक्ताओं के लिए अलग श्रेणी बनाने का प्रस्ताव है।
प्रस्ताव के अनुसार, जो उपभोक्ता 300 यूनिट तक बिजली की खपत करते हैं, उनसे घरेलू दरों पर ही शुल्क लिया जा सकता है। इससे छोटे दुकानदारों को बड़ी राहत मिलेगी, खासकर उन लोगों को जो सीमित बिजली उपकरण जैसे बल्ब और पंखे का ही उपयोग करते हैं। वर्तमान में घरेलू बिजली दरें लगभग 4 से 5 रुपये प्रति यूनिट हैं, जबकि कॉमर्शियल दरें करीब 8 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच जाती हैं।
इसके अलावा कॉमर्शियल कनेक्शन पर न्यूनतम अधिभार शुल्क भी करीब 500 रुपये देना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने पर यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम हो सकता है। वहीं, बिजली दरों में फिलहाल बढ़ोतरी के संकेत नहीं हैं। पावर कॉर्पोरेशन ने 1.15 लाख करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व आवश्यकता का प्रस्ताव दिया है, जबकि बिजली आपूर्ति की लागत 8.50 से 8.80 रुपये प्रति यूनिट आंकी गई है।
इसके बावजूद उपभोक्ताओं के पक्ष में करीब 51 हजार करोड़ रुपये का सरप्लस बताया जा रहा है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि जून में जारी होने वाली नई दरों में बढ़ोतरी नहीं की जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं को अतिरिक्त राहत मिल सकती है।




