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जून में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या 12 प्रतिशत घटकर 1.35 करोड़ रही, इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी बढ़ी

21 जुलाई घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या जून में लगभग 12 प्रतिशत घटकर 1.35 करोड़ रही, जबकि मई में एयरलाइन कंपनियों ने 1.53 करोड़ यात्रियों को सेवाएं दी थीं। सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। बीते वर्ष इसी महीने में 1.36 करोड़ यात्रियों की संख्या की तुलना में पिछले महीने यह गिरावट मामूली रही।

आम तौर पर, जून, जुलाई और अगस्त का समय एयरलाइंस के लिए यात्रियों की संख्या के लिहाज से नरम होता है। नागर विमानन महानिदेशालय(डीजीसीए) के आंकड़ों के अनुसार, जून में इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 66.3 प्रतिशत हो गयी जो मई में 64.9 प्रतिशत थी। इसी दौरान एयर इंडिया समूह की बाजार हिस्सेदारी घटकर 23.9 प्रतिशत रह गयी जो इससे पिछले महीने 25.6 प्रतिशत थी।

अकासा एयर की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 6.4 प्रतिशत हो गयी जो मई में 5.8 प्रतिशत थी। स्पाइसजेट की बाजार हिस्सेदारी घटकर पिछले महीने 1.9 प्रतिशत रही जो मई में 2.5 प्रतिशत थी। डीजीसीए ने जून के लिए यातायात आंकड़ों पर अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘‘घरेलू एयरलाइन कंपनियों से जनवरी-जून, 2026 के दौरान यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या 864.04 लाख थी, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 851.74 लाख थी।

इस तरह सालाना आधार पर 1.44 प्रतिशत की वृद्धि और मासिक आधार पर 1.03 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।’’ पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ने की वजह से एयरलाइन कंपनियों ने अपने नेटवर्क में भी कुछ समय के लिए कटौती की थी। इंडिगो का जून में समय पर उड़ान संचालन 89.4 प्रतिशत रहा। इसके बाद एयर इंडिया ग्रुप (85.9 प्रतिशत), अकासा एयर (82.7 प्रतिशत), अलायंस एयर (74.7 प्रतिशत) और स्पाइसजेट (33.5 प्रतिशत) का स्थान रहा।

समय पर उड़ान संचालन (ओटीपी) की गणना 10 प्रमुख हवाई अड्डों… बेंगलुरु, दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, अहमदाबाद, कोचीन, गुवाहाटी और लखनऊ… के लिए की जाती है। पिछले महीने,अनुसूचित घरेलू एयरलाइंस के लिए कुल उड़ान रद्द होने की दर 0.63 प्रतिशत रही। जून में उड़ानें रद्द होने से प्रभावित 43,968 यात्रियों के मुआवजे और सुविधाओं के लिए घरेलू एयरलाइंस ने 61.98 लाख रुपये खर्च किए।

आंकड़ों के अनुसार, उड़ान में देरी से प्रभावित 1,10,273 यात्रियों की सुविधाओं पर एयरलाइंस ने कुल 2.85 करोड़ रुपये खर्च किए। विमानन कंपनियों ने जून में 1,847 यात्रियों को बोर्डिंग से मना कर दिया। एयरलाइंस ने इस मामले में मुआवजे और सुविधाओं के लिए 64.84 लाख रुपये खर्च किए।

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