17 हजार करोड़ से बदली यूपी की जेलों की तस्वीर, बजट में 215% का इजाफा
प्रदेश की जेलों को आधुनिक, सुरक्षित और बेहतर सुविधाओं से लैस करने के लिए योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। इस दौरान जेलों के इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ आधुनिकीकरण और नई तकनीक को भी प्राथमिकता दी गई। सरकार के प्रयासों से एक ओर जेलों में बंदियों की क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम हुआ है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को तकनीक से मजबूत किया जा रहा है।
डीजी कारागार एवं सुधार सेवाएं पीसी मीना ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में जेल विभाग का बजट 913.07 करोड़ रुपये था, जो 2026-27 में बढ़कर 2,877.58 करोड़ रुपये हो गया है। इस तरह करीब साढ़े नौ वर्षों में विभाग के बजट में 215 फीसदी की वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच जेल विभाग के लिए कुल 5,494.41 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हुआ। वहीं 2022-23 से 2026-27 तक यह राशि बढ़कर 11,913.53 करोड़ रुपये हो गई। बजट में यह बढ़ोतरी जेलों के विकास और आधुनिकीकरण को दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाती है।
नई जेलों से बढ़ेगी बंदी क्षमता
जेलों में क्षमता विस्तार के लिए कई जिलों में नई जिला जेलों का निर्माण कराया जा रहा है। अमेठी में 176.12 करोड़, महोबा में 203.42 करोड़, हाथरस में 184.94 करोड़, कुशीनगर में 228.31 करोड़, जौनपुर में 179.79 करोड़ और हापुड़ में 190.08 करोड़ रुपये की लागत से जिला कारागारों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा प्रस्तावित जेलों के लिए भूमि खरीद की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है। संभल में 24.56 करोड़, शामली में 96.20 करोड़, बलिया में 24.12 करोड़, सहारनपुर में 50.87 करोड़, अमरोहा में 32.28 करोड़ और चंदौली में 34.27 करोड़ रुपये भूमि के लिए स्वीकृत किए गए हैं।



