गांव की महिलाओं के हाथ में अब रोजगार की कमान, बैंकिंग से राशन तक संभाल रहीं जिम्मेदारी; जानें किसे कितना मिल रहा मानदेय
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के जरिये जिले की आर्थिक रूप से कमजोर पात्र महिलाओं को रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। महिलाएं गांवों में समूह गठन से लेकर बैंकिंग, बिजली बिल जमा करने, सामुदायिक शौचालय संचालन, राशन वितरण और पोषण संबंधी कार्यों तक में जिम्मेदारी संभाल रही हैं। अलग-अलग कार्यों के लिए महिलाओं को मानदेय या कमीशन दिया जा रहा है।
मिशन के तहत 1,356 समूह सखी को दो हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है। 1,179 आजीविका सखी को कार्य के आधार पर मानदेय मिलता है। वहीं 359 विद्युत सखी बिजली बिल जमा कराने पर प्रति बिल कमीशन अर्जित कर रही हैं। 110 बैंक सखी को छह हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाता है, जबकि 896 बीसी सखी वित्तीय लेनदेन के आधार पर कमीशन प्राप्त कर रही हैं।
शौचालय से राशन तक संभाल रहीं जिम्मेदारी
जिले में 974 सामुदायिक शौचालय सखी को छह हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है। 100 महिलाएं टेक होम राशन तैयार करने के काम में लगी हैं, जिन्हें आठ हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता है। इसके अलावा 35 महिलाएं उचित दर की दुकानों का संचालन कर रही हैं। इन्हें राशन वितरण पर कमीशन मिलता है।
गांव-गांव समूह बनाने का जिम्मा
75 महिलाएं आंतरिक सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (आईसीआरपी) के रूप में काम कर रही हैं। इनका मुख्य कार्य गांवों में जाकर स्वयं सहायता समूहों का गठन कराना है। इन्हें प्रतिदिन 200 से 500 रुपये तक मिलते हैं। वहीं 62 वरिष्ठ आंतरिक सामुदायिक संसाधन व्यक्ति को प्रतिदिन 400 से 600 रुपये तक का भुगतान किया जाता है।615 महिलाएं खाद्य, पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (एफएनएचडब्ल्यू) से जुड़ी हैं। इन्हें 1,500 रुपये मासिक मानदेय दिया जाता है।
उपायुक्त स्वत: रोजगार के. डी. गोस्वामी ने बताया कि जरूरतमंद महिलाओं को उनकी क्षमता और रुचि के अनुसार रोजगार से जोड़ा जा रहा है। समय-समय पर प्रशिक्षण देकर उन्हें कार्य के लिए अपडेट किया जाता है। रोजगार की इच्छुक महिलाओं को प्रशिक्षण दिलाकर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।



