यूपी की वोटर लिस्ट से 1.27 करोड़ हिंदुओं के नाम गायब? CM योगी ने BJP कार्यकर्ताओं को दिया बड़ा टास्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में वोटर लिस्ट से जुड़े आंकड़े साझा करते हुए दावा किया कि प्रदेश में करीब 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब हैं। उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को छूटे हुए पात्र मतदाताओं के नाम जुड़वाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की मौजूदा मतदाता सूची में लगभग 13 करोड़ लोगों के नाम दर्ज हैं, जबकि जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर मतदाताओं की संख्या 16 करोड़ से अधिक होनी चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि मतदाता सूची में नाम शामिल नहीं होने का असर नगरीय निकायों की 28 सीटों पर पड़ सकता है। ऐसे में पात्र लोगों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल कराना संगठन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
पंचायत की वोटर लिस्ट में नाम, विधानसभा सूची से गायब
सीएम योगी ने बैठक में मतदाता सूची से जुड़े अलग-अलग वर्गों के आंकड़े भी रखे। उन्होंने बताया कि करीब 66 लाख ऐसे लोग हैं, जिनके नाम पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज हैं, लेकिन विधानसभा की वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हैं। इसके अलावा सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले लगभग 55 लाख लोगों के नाम भी मतदाता सूची में नहीं होने का दावा किया गया।
4.5 लाख युवा भी वोटर लिस्ट से बाहर
मुख्यमंत्री ने पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को भी अभियान से जोड़ने पर जोर दिया। उनके अनुसार, प्रदेश में करीब साढ़े चार लाख ऐसे युवा हैं, जिनकी उम्र 18 से 19 वर्ष के बीच है, लेकिन उनके नाम अभी मतदाता सूची में दर्ज नहीं हैं। उन्होंने दूसरे राज्यों से उत्तर प्रदेश में विवाह करके आई महिलाओं के नाम भी वोटर लिस्ट में शामिल कराने की आवश्यकता बताई।
सांसदों-विधायकों को नियमित समीक्षा की जिम्मेदारी
सीएम योगी ने बीजेपी सांसदों, विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों को मतदाता सूची से जुड़े अभियान की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि कमल साथी ऐप पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर पात्र मतदाताओं की पहचान करें और उनके नाम सूची में जुड़वाने के लिए सक्रियता से काम करें।
मुख्यमंत्री ने इस पूरी प्रक्रिया में संगठन के नेताओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया है। हालांकि, बैठक में पेश किए गए ये आंकड़े मुख्यमंत्री के दावे हैं। इन्हें चुनाव आयोग की ओर से स्वतंत्र रूप से सत्यापित आधिकारिक आंकड़े नहीं माना जाना चाहिए।



