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शबरी जयंती पर बेर के भोग से पूरी होगी हर मनोकामना, जानें संपूर्ण विधि और मंत्र।

हिंदू धर्म में शबरी जंयती भक्ति अटूट विश्वास का पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह तिथि उस भक्त को समर्पित है, जिन्होंने अपनी प्रतीक्षा और प्रेम से साक्षात भगवान श्री राम को अपने कुटिया पर बुलाया था। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाने वाली शबरी जयंती इस बार 8 फरवरी यानी आज के दिन मनाई जा रही है। भगवान राम ने शबरी माता के जूठे बेर खाकर पूरे संसार को यह संदेश दिया था कि भक्ति में न कोई छोटा होता है और न ही कोई बड़ा। आइए आपको बताते हैं इस शुभ दिन की सरल पूजा विधि, भोग और मंत्र।

जानें पूजा विधि

– स्नान करने के बाद हाथ में जल लेकर भगवान राम व माता शबरी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।

– पूजा घर या किसी साफ स्थान पर गंगाजल छिड़कें।

– इसके बाद, वहां एक वेदी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान राम, माता सीता और माता शबरी की प्रतिमा स्थापित करें।

– गाय के घी का दीपक और धूप जलाएं।

– भगवान राम को पीले फूल और माता सीता व देवी शबरी को लाल फूल अर्पित करें।

– इसके बाद गोपीचंदन और रोली का तिलक लगाएं।

– पूजा के दौरान रामायण के ‘शबरी प्रसंग’ का पाठ करें या सुनें।

– फिर शबरी कथा का पाठ करें।

– आखिर में आरती करें। पूजा में हुई सभी गलती के लिए क्षमा मांगे।

लगाएं ये भोग

बेर का भोग- इस दिन भगवान राम और माता शबरी को बेर भोग अर्पित करें। इस बात का ध्यान रखें कि फल ताजे और मीठे हों।

सात्विक मिठाई- इसके अतिरिक्त, कंद-मूल, शहद और घर में बनीं केसरिया खीर का भोग लगाएं।

इन मंत्रों का जाप करें

– ॐ रामाय नमः॥

– ॐ भक्तवत्सलायै नमः॥

– श्री राम जय राम जय जय राम॥

– राम रामायेति रामेति रमे रामे मनोरमे।

– सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥

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