‘फिल्म देखे बिना राय न बनाएं’, रामायण के डिजाइनरों ने सीता और कैकेयी के मॉडर्न लुक का किया बचाव, ब्लाउज -हेयरस्टाइल विवाद पर सफाई
नितेश तिवारी निर्देशित आगामी भव्य फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ अपने किरदारों के लुक्स और कॉस्ट्यूम डिजाइन को लेकर जबरदस्त चर्चा और सोशल मीडिया पर ट्रॉलिंग का सामना कर रही है। खासकर देवी सीता बनीं साई पल्लवी के ब्लाउज डिजाइन और रानी कैकेयी का किरदार निभा रहीं लारा दत्ता की साड़ी, ब्लाउज व सैलून-स्टाइल हेयरस्टाइल पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस चौतरफा आलोचना के बीच ‘पद्मावत’ और ‘हीरामंडी’ जैसी ऐतिहासिक परियोजनाओं के लिए मशहूर कॉस्ट्यूम डिजाइनर रिंपल और हरप्रीत नरूला ने सामने आकर अपने विजुअल ट्रीटमेंट और क्रिएटिव चॉइस (रचनात्मक स्वतंत्रता) का मजबूती से बचाव किया है। उन्होंने दर्शकों से अपील की है कि वे सिनेमाघरों में पूरी फिल्म देखने से पहले कोई जल्दबाजी में राय न बनाएं।
‘पद्मावत’ और ‘हीरामंडी: द डायमंड बाज़ार’ में अपने काम के लिए मशहूर डिज़ाइनर रिंपल और हरप्रीत नरूला का कहना है कि उन्हें इस तरह की छानबीन या आलोचना की उम्मीद थी। उनके लिए, रामायण जैसी महागाथा के लिए कॉस्ट्यूम डिज़ाइन करना, जो लोगों की यादों में गहराई से बसी है, हमेशा रिसर्च और अपनी समझ (इंटरप्रिटेशन) के बीच संतुलन बनाने जैसा था।
किरदारों के लुक पर हो रही आलोचनाओं का जवाब देते हुए रिंपल ने बताया कि त्रेता युग के ऐसे कोई कपड़े सुरक्षित नहीं हैं जिनसे पक्के तौर पर यह पता चल सके कि उस समय लोग क्या पहनते थे। उन्होंने समझाया, “कॉस्ट्यूम डिज़ाइन की नींव रिसर्च होती है, लेकिन अपनी समझ से उसे पेश करना ही उसे कला बनाता है। उस दौर के ऐसे कोई कपड़े सुरक्षित नहीं हैं जिन्हें हम बस वैसा ही दोबारा बना सकें। हम सभी कैलेंडर आर्ट, मिनिएचर पेंटिंग, मंदिरों की तस्वीरों और राजा रवि वर्मा की बनाई तस्वीरों को देखकर बड़े हुए हैं।”
रिंपल ने साई पल्लवी के ब्लाउज़ डिज़ाइन को लेकर हो रही आलोचनाओं पर भी बात की और बताया कि सीता के बारे में उनकी समझ उन तस्वीरों से बनी है जिन्हें भारतीय लोग बचपन से देखते आ रहे हैं।
उन्होंने कहा, “जब मैं अपनी आँखें बंद करके देवी सीता के बारे में सोचती हूँ, तो मैं पुरातात्विक प्रमाणिकता के बारे में नहीं सोचती। मैं चाहती थी कि मेरी देवी—जो मेरे मंदिर में विराजमान हैं—वैसी ही दिखें जैसी छवि मेरे मन में बसी है। यह एक सोच-समझकर किया गया फ़ैसला था।



