CRINK Alliance बना US के लिए चुनौती, लेकिन China और Russia में गहरा अविश्वास
चीन, ईरान, उत्तर कोरिया और रूस इन चार देशों के समूह को कभी-कभी CRINK कहा जाता है, और कई क्षेत्रों में इनका आपस में खास तालमेल है। फिर भी, इन चारों के बीच गहरा शक बना हुआ है। यही वजह है कि चीन बहुत सावधानी से रास्ता चुन रहा है ताकि उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग न होना पड़े, और साथ ही वह अपने जैसे सत्तावादी देशों के साथ एकजुटता भी दिखा सके। ईरान और यूक्रेन युद्धों का विश्लेषण करते हुए, अमेरिका स्थित सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ (CSIS) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इन दो संघर्षों ने CRINK के सुरक्षा संबंधों की ताकत और सीमाओं, दोनों को दिखाया है। यूक्रेन युद्ध ने दिखाया है कि कैसे चार देश एक साझा मकसद के लिए अपनी-अपनी खास ताकतों का इस्तेमाल कर सकते हैं। उत्तर कोरिया ने बड़ी संख्या में सैनिक और कम आधुनिक हथियार उपलब्ध कराए हैं। ईरान ने बड़ी संख्या में हथियारबंद ड्रोन और मिसाइलें दी हैं। चीन ने अपनी विशाल आर्थिक और औद्योगिक ताकत का इस्तेमाल रूस की युद्धकालीन अर्थव्यवस्था और रक्षा-औद्योगिक आधार को सहारा देने के लिए किया है, जबकि उसने सैनिक या घातक हथियार नहीं भेजे हैं।
लेखकों ने आगे कहा ऐसा करके, उन सभी ने मिलकर संसाधन और क्षमताएं जुटाने की अपनी काबिलियत दिखाई है, जो अमेरिका और उसके सहयोगियों व साझेदारों के लिए बहुत बड़ी चुनौती है।” CRINK का सहयोग आमतौर पर लेन-देन और मौके का फायदा उठाने की सोच से प्रेरित होता है। बेशक, क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों में अमेरिका को हटाने की आपसी इच्छा है, लेकिन अविश्वास भी बहुत ज़्यादा है। पुरानी कहावत है कि ‘चोरों में कोई सम्मान नहीं होता’, इसी वजह से हर देश सावधानी से कदम उठाता है ताकि किसी दूसरे देश के फायदे के लिए उसके अपने रणनीतिक मकसद की बलि न चढ़ जाए। उदाहरण के लिए, चूंकि चीन की अर्थव्यवस्था वैश्विक व्यापार पर निर्भर है, इसलिए बीजिंग यूक्रेन में व्लादिमीर पुतिन की युद्ध मशीन का खुलकर समर्थन नहीं कर सकता, जैसा कि प्योंगयांग ने गोला-बारूद, हथियारों और सैनिकों के साथ किया है। ऐसा करने पर यूरोप और अमेरिका से कड़े प्रतिबंध लग सकते हैं, इसलिए चीन ने रूस को दी जाने वाली साजो-सामान की मदद को छिपाकर रखने के लिए संयम बरता है।



