बैंक ने यह भी आरोप लगाया है कि Company फर्जी लेनदेन के सहारे देश के बाहर सोना और धन भेज रही थी। यहॉं देखा जाना चाहिए कि बैंक के सज्ञान में कब आया कि Company फर्जी लेन-देन कर रही है और नाजायत रूप से सोना और धन देश के बाहर भेज रही है।
रिजर्व बैंक/वित्त सचिव/वित्त मंत्रालय को यह नोटिस समस्त बैंकों कामर्शियल/प्राइवेट/सहकारी को भेजना चाहिए कि जिस किसी भी बैंक में एलसी/एलओयू अथवा अन्य किसी भी प्रकार के लोन की भरपाई नहीं हो रही है और उसके डूबने की आशंका है।
तो इसकी सूचना मंत्रालय/रिजर्व बैंक/सीवीसी को उपलब्ध कराये वरना 31 मार्च 2018 के बाद आने वाले ऐसे किसी भी फ्राड के लिए तत्सम्बन्धित बैंक का शीर्ष प्रबन्धन ही जिम्मेदार होगा और जिसकी भरपाई उच्च प्रबन्धन कीे प्रापर्टी से की जायेगी।
बैंक के महाप्रबन्धक/कई तरह के प्रबन्ध निदेशक/बोर्ड के निदेशक/चेयरमैन साफ तौर पर बचकर निकल जा रहे हैं और केवल लोन/लिमिट लेने वालों को ही दोषी बनाया जा रहा है, जबकि बैंक स्टाफ की भी भागीदारी पचास प्रतिशत की है। ये सब जानते हैं कि कहॉं फ्राड हो रहा है!
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