इससे पहले वे बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा सरकारों में मंत्री रह चुके थे। उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत छात्र नेता के तौर पर की थी।
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अभी उनकी पत्नी गीता कोड़ा झारखंड विधानसभा की सदस्य हैं और कई मौक़ों पर उन्होंने झारखंड में सत्तासीन भाजपा सरकार के पक्ष में वोट दिया है।
चुनाव आयोग ने इसी साल अपने एक फ़ैसले में उन्हें चुनाव लड़ने के लिए तीन साल तक अयोग्य करार दिया था।
उन पर चुनाव प्रचार का हिसाब सही तरीक़े से नहीं देने का भी आरोप था।
अब अगर उन्हें तीन साल से ज़्यादा की सज़ा होती है तो वे चुनाव लड़ने के लिए आजीवन अयोग्य घोषित कर दिए जाएंगे।
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