West Bengal में चुनाव प्रचार थमने से पहले Modi-Shah और Mamata ने झोंकी पूरी ताकत, किस करवट बैठेगा ऊँट?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के प्रचार का शोर थमने से पहले राजनीतिक दलों ने अपने अभियान को अंतिम दौर में पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ाया। चुनाव प्रचार थमने से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, वामपंथी दलों और कांग्रेस के नेताओं ने जनसभाओं, रोड शो और जमीनी संपर्क के जरिए मतदाताओं को साधने की पूरी कोशिश की। हम आपको बता दें कि दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को 142 सीटों पर होना है।
भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने आक्रामक प्रचार अभियान चलाया। प्रधानमंत्री ने हुगली के आरामबाग और उत्तर 24 परगना के बांगांव में जनसभाओं को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार, कुप्रशासन और सिंडिकेट व्यवस्था को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में महिलाओं की स्थिति खराब हुई है और संदेशखाली जैसी घटनाएं इसका उदाहरण हैं। प्रधानमंत्री ने किसानों के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया और कहा कि केंद्र सरकार ने जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य को दोगुना किया है, खरीद बढ़ाई है और जूट उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए नीतियां बनाई हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक दिन पहले कोलकाता में रोड शो भी किया, जिसमें बड़ी संख्या में समर्थक शामिल हुए। इसके अलावा उन्होंने ठाकुरनगर स्थित मतुआ समुदाय के प्रमुख मंदिर और कोलकाता के ऐतिहासिक ठनठनिया काली मंदिर में पूजा अर्चना कर इस समुदाय तक पहुंचने का प्रयास किया। मतुआ समुदाय को राज्य की कई सीटों पर प्रभावशाली माना जाता है, इसलिए इसे साधना भाजपा की रणनीति का अहम हिस्सा रहा।
दूसरी ओर अमित शाह ने रैलियां और रोड शो करते हुए कई लोकलुभावन वादे किए। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा सत्ता में आती है तो महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को प्रति माह तीन हजार रुपये की सहायता दी जाएगी तथा गर्भवती महिलाओं को 21 हजार रुपये दिए जाएंगे। उन्होंने सिंडिकेट राज और गुंडा राज समाप्त करने, घुसपैठ पर रोक लगाने और अधूरे विकास कार्यों को पूरा करने का वादा किया। शाह ने यह भी दावा किया कि पहले चरण में ही भाजपा को भारी बढ़त मिल चुकी है।
वहीं तृणमूल कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जमीनी स्तर पर संपर्क को प्राथमिकता दी। उन्होंने कोलकाता के बाजारों में जाकर सब्जी विक्रेताओं और आम लोगों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने महंगाई और रोजमर्रा की समस्याओं को चुनावी मुद्दा बनाया तथा राज्य सरकार की योजनाओं, खासकर लक्ष्मी भंडार योजना के जरिए महिलाओं को समर्थन जारी रखने का भरोसा दिया। ममता बनर्जी ने खुद को जनता के करीब दिखाने की कोशिश की और भाजपा पर दिखावटी राजनीति करने का आरोप लगाया।
तृणमूल कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी भाजपा पर बाहरी ताकत होने का आरोप लगाते हुए क्षेत्रीय अस्मिता को मुद्दा बनाया। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि जनता का समर्थन उन्हें भारी बहुमत दिलाएगा। वहीं भाजपा ने राज्य में कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया।
चुनाव प्रचार के दौरान दोनों प्रमुख दलों के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली। ममता बनर्जी ने भाजपा के प्रचार अभियानों को बनावटी बताया, जबकि भाजपा ने तृणमूल सरकार को जंगल राज करार दिया। इसके साथ ही कुछ क्षेत्रों में राजनीतिक हिंसा और झड़पों की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे चुनावी माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
हम आपको यह भी बता दें कि निर्वाचन आयोग ने दूसरे चरण के मतदान से पहले कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। संवेदनशील इलाकों में केंद्रीय बलों की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी और गश्त की व्यवस्था की गई है ताकि मतदाता निर्भय होकर मतदान कर सकें। आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या मतदाताओं को डराने की कोशिश पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
किन क्षेत्रों का इस बार ज्यादा महत्व नजर आ रहा है
जहां तक दूसरे चरण के मतदान में महत्वपूर्ण क्षेत्रों की बात है तो आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल के चुनावी परिदृश्य में उत्तरी बंगाल की पहाड़ियों या जंगलमहल के वनक्षेत्र की सरकार बनाने में भूमिका बहुत कम होती है। यहां आमतौर पर सत्ता का फैसला दक्षिणी बंगाल के घनी आबादी वाले मैदानी इलाकों से होता है। उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिले इस चुनावी जंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। यह दोनों जिले कोलकाता और हावड़ा के साथ तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए यह सत्ता हासिल करने का महत्वपूर्ण रास्ता है।
भाजपा सत्तारुढ़ पार्टी के दक्षिणी गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है, जिसके साथ दो सबसे बड़े जिले- 33 सीट वाला उत्तर 24 परगना और 31 सीट वाला दक्षिण 24 परगना, एक बार फिर बंगाल के चुनाव जीतने की कुंजी साबित होंगे। कोलकाता की 11 सीटों और हावड़ा की 16 सीटों के साथ, ये चार जिले बंगाल विधानसभा की 294 सीट में से 91 सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं- जो सदन का लगभग एक तिहाई हिस्सा होने के कारण चुनावों में सबसे निर्णायक क्षेत्र बन जाते हैं।
हम आपको बता दें कि उत्तर और दक्षिण 24 परगना उस मुकाबले का केंद्र बने हुए हैं, जिसे बंगाल के राजनेता अक्सर ‘‘बंगाल के उत्तर प्रदेश का चुनावी नक्शा’’ कहते हैं। यह वह क्षेत्र है जो राज्य सचिवालय नबान्न में सत्ता बना या बिगाड़ सकता है। प्रेसिडेंसी प्रभाग में कोलकाता, हावड़ा, नादिया, उत्तर और दक्षिण 24 परगना शामिल है तथा यहां 111 सीटें हैं, जो तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ बना हुआ है। पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा के मजबूत प्रयासों के बावजूद तृणमूल कांग्रेस ने इन 111 में से 96 सीटें जीतीं थीं जबकि भाजपा को केवल 14 और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) को एक सीट ही मिल पाई थी। भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों में अपनी पकड़ मजबूत की और यहां की 21 सीट पर बढ़त हासिल की, जबकि तृणमूल कांग्रेस 90 सीट में आगे रही।



