उत्तर प्रदेशफ्लैश न्यूजभारत

SGPGI में होने जा रहा भारत का पहला कॉन्क्लेव : टेली-रोबोटिक सर्जरी के लिए नई उम्मीद बना रोबोकॉप्स 2026

उत्तर प्रदेश के टॉप चिकित्सा संस्थान एसजीपीजीआई में एक खास कॉन्क्लेव होने जा रहा है। जिसका आगाज कल यानी 3 अप्रैल से होगा। इस कॉन्क्लेव का नाम रोबोकॉप्स 2026 रखा गया है। जिसकी मेजबानी का जिम्मा संस्थान के पीडियाट्रिक सर्जरी सुपर स्पेशलिटी विभाग के ऊपर है।

यह पूरा कॉन्क्लेव पीडियाट्रिक रोबोटिक सर्जरी के भविष्य की एक झलक दिखायेगा। इतना ही नहीं आने वाले समय में टेली सर्जरी की नई उम्मीद भी पैदा करेगा।  रोबोकॉप्स 2026 में देश दुनिया के कई दिग्गज पीडियाट्रिक सर्जन शामिल होंगे। जो 200 से अधिक डॉक्टर्स को पीडियाट्रिक रोबोटिक सर्जरी के गुर सिखायेंगे। यह जानकारी संस्थान के पीडियाट्रिक सर्जरी सुपर स्पेशलिटी विभाग के एचओडी प्रो.बसंत कुमार ने गुरुवार को दी है।

उन्होंने बताया कि यह अत्यंत गर्व का विषय है कि एसजीपीजीआईएमएस रोबोकॉप्स 2026 का आयोजन कर रहा है।  3 अप्रैल से शुरू होने वाले पीडियाट्रिक सर्जन का तीन दिवसीय प्रमुख रोबोटिक सर्जरी सम्मेलन 5 अप्रैल तक चलेगा। ” रोबोटिक नवाचार के माध्यम से पीडियाट्रिक सर्जरी के भविष्य को आगे बढ़ाना” विषय पर केंद्रित इस वैज्ञानिक सम्मेलन का उद्देश्य सबसे कम उम्र के और सबसे संवेदनशील मरीजों यानी की बच्चों के उपचार में रोबोटिक प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका का पता लगाना है। इस कार्यक्रम का आधिकारिक उद्घाटन पहले दिन एसजीपीजीआई के निदेशक प्रोफेसर आर के धीमन द्वारा किया जाएगा, जो समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

यह सम्मेलन शुक्रवार को एसजीपीजीआई स्थित लाइब्रेरी कॉम्प्लेक्स के डीके छाबड़ा सभागार में एक व्यापक सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम के साथ शुरू होगा। पहला दिन रोबोटिक्स के तकनीकी और आर्थिक मूलभूत सिद्धांतों को समर्पित है, जिसमें रोबोटिक प्लेटफॉर्म, हार्डवेयर और डॉकिंग रणनीतियों पर विशेषज्ञ सत्र शामिल हैं।

क्या है टेली रोबोटिक सर्जरी

डॉ. बसंत कुमार के मुताबिक टेली-रोबोटिक सर्जरी एक ऐसी अत्याधुनिक तकनीक है, जिसके जरिये एक सर्जन मरीज से सैकड़ों या हज़ारों किलोमीटर दूर बैठकर रोबोटिक सिस्टम के जरिए सफल ऑपरेशन कर सकता है। यह तकनीक ग्रामीण या दूरदराज के क्षेत्रों में विशेषज्ञों की कमी को दूर कर सकती है, जिससे दूरदराज के मरीजों को भी बेहतरीन इलाज मिल सकता है।

Related Articles

Back to top button

mahjong ways

slot777