जुबिन गर्ग मौत मामला: दो आरोपियों की जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी असम सरकार
असम सरकार गायक जुबिन गर्ग की मौत के मामले में सात आरोपियों में से दो को जमानत देने संबंधी गुवाहाटी उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छुट्टियों के बाद उच्चतम न्यायालय खुलते ही विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की जाएगी।
यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीआईडी के विशेष पुलिस महानिदेशक मुन्ना प्रसाद गुप्ता ने कहा, “गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने मामला संख्या 18/25 में दो आरोपियों को जमानत दी है। हमने अदालत के आदेशों का अध्ययन किया है और उनका विश्लेषण करने के साथ-साथ कानूनी राय लेने के बाद जमानत के इन आदेशों को माननीय उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने का फैसला किया है।’’ उन्होंने हालांकि जमानत के आदेशों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘अदालत में अभी छुट्टियां हैं।
इसके दोबारा खुलते ही हम याचिका दायर करेंगे।’’ गर्ग के बैंड की सदस्य एवं गायिका अमृतप्रभा महंत तथा असम पुलिस के निलंबित उपाधीक्षक संदीपन गर्ग को उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई है। गायक जुबिन गर्ग की पिछले साल 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। राज्यभर में 60 से अधिक प्राथमिकी दर्ज होने के बाद, सीआईडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने गर्ग की मौत के मामले की जांच की।
एसआईटी ने पिछले साल दिसंबर में यहां की एक स्थानीय अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था, जिसमें सातों आरोपियों के नाम शामिल थे। इनमें से चार पर हत्या का आरोप है। सिंगापुर पुलिस ने भी इस मामले की अलग से जांच की और निष्कर्ष निकाला कि इसमें किसी साजिश या जानबूझकर की गई गड़बड़ी का कोई सबूत नहीं मिला।
असम के अधिकारियों ने हालांकि स्पष्ट किया कि सिंगापुर पुलिस की जांच के निष्कर्षों का यहां मामले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस बीच राज्य के महाधिवक्ता देवजीत सैकिया ने एक अन्य प्रेस वार्ता में कहा कि निचली अदालतों ने आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं, लेकिन अब उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी है। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने महंत के जमानत आदेश का अध्ययन किया है और उसमें कुछ विसंगतियां पाई हैं।
गृह विभाग ने इस मामले में मुझसे सलाह ली थी। मैंने उन्हें सुझाव दिया है कि यह आदेश स्वीकार्य नहीं है और हमें इसे चुनौती देनी चाहिए।” महाधिवक्ता ने कहा कि छुट्टियों के बाद उच्चतम न्यायालय के दोबारा खुलते ही महंत के जमानत आदेश को चुनौती देने के लिए एसएलपी दायर करने की प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जमानत आदेश में की गई कुछ टिप्पणियां मुकदमे की सुनवाई में परेशानी पैदा कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि इसलिए राज्य सरकार उन टिप्पणियों को हटाने और जमानत के आदेश को रद्द करने के लिए अपील करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘मुकदमे की सुनवाई एक महत्वपूर्ण चरण में है और मामले की सुनवाई रोजाना हो रही है। ऐसे समय में आरोपियों को जमानत दिए जाने से हमारे लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।’’ संदीपन की जमानत के संबंध में उन्होंने कहा कि अभी तक विस्तृत आदेश उपलब्ध नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि यदि उसमें कोई विसंगति पाई जाती है, तो राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय में एसएलपी दायर करेगी। सैकिया ने कहा कि कि राज्य सरकार जुबिन गर्ग को “न्याय” दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।



