Bangladesh जैसी साजिश रच रहा Opposition, फडणवीस बोले- देश में अस्थिरता का षड्यंत्र
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को विपक्ष पर विरोध-प्रदर्शनों की आड़ में सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने और अराजकता फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस और उसके सहयोगियों के प्रदर्शनों को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा जताई गई चिंताओं को ही दोहराया। ‘X’ पर एक पोस्ट में मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि हो गया भाई, सब कुछ सामने आ गया!! आखिरकार, यह सब ‘सत्ता परिवर्तन’ (Regime Change) के बारे में ही तो था… आखिर दिल में छिपा राज़ जुबान पर आ ही गया!
पोस्ट में लिखा था कि पूरा खेल सत्ता हासिल करने का है… और इसके लिए छात्रों और किसानों को भड़काना, जाति और भाषा के नाम पर नफरत फैलाना, या देश के प्रतिष्ठित संस्थानों की छवि खराब करना क्यों न किया जाए? किसी आंदोलन की आड़ में अराजकता फैलाना ही ‘उनका’ असली मकसद है। उनकी यह टिप्पणी तब आई जब रक्षा मंत्री ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर आरोप लगाया कि वे चुनाव आयोग के खिलाफ युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों का इस्तेमाल राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वे बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में सत्ता परिवर्तन चाहते हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष युवाओं को अराजकता की राजनीति का मोहरा बनाकर देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिंह ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में जो कुछ हुआ है, वह कई गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसा लगता है कि कांग्रेस और उसके राजनीतिक सहयोगी—चाहे सीधे तौर पर हों या अपने जुड़े हुए संगठनों के माध्यम से—युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों और राष्ट्र-निर्माण में लगाने के बजाय, उसका इस्तेमाल राजनीतिक टकराव और अराजकता फैलाने के लिए कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को अराजकता की राजनीति में मोहरे की तरह इस्तेमाल करने की कोशिशें हो रही हैं। कुछ लोग—बांग्लादेश की घटनाओं की तर्ज पर-सत्ता परिवर्तन चाहते हैं और खुलेआम स्वीकार करते हैं कि उन्हें बांग्लादेश के हालात से प्रेरणा मिली है; वहीं कुछ अन्य लोग बेशर्मी से सरकार को गिराने की मांग कर रहे हैं। इससे यह साफ हो जाता है कि उनका एकमात्र एजेंडा लोकतांत्रिक संस्थाओं को नष्ट करना और देश में आग लगाना है… उनकी लड़ाई न तो चुनावी सुधारों के लिए है, न ही इसका संबंध एसआईआर (SIR) या ज्ञानेश कुमार से है; और न ही यह देश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए है—बल्कि, यह देश में अराजकता फैलाकर सत्ता हथियाने की एक साजिश है।



