भारतसाइबर संवाद

Election Commission का समर्थन करते हुए 124 पूर्व नौकरशाहों ने चुनावी धांधली के दावों पर उठाए सवाल

भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और अन्य संबद्ध सेवाओं के 124 पूर्व अधिकारियों ने देश के नागरिकों के नाम एक खुला पत्र जारी कर निर्वाचन आयोग एवं मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया का पुरजोर समर्थन किया है और बिना किसी ठोस सबूत के चुनाव में धांधली के आरोप लगाए जाने पर सवाल उठाए हैं। पूर्व अधिकारियों ने कहा कि इसी निर्वाचन आयोग के तहत केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव हारी और 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने दम पर बहुमत भी हासिल नहीं कर सकी। पत्र में कहा गया, ‘‘चुनाव जीतने वालों ने कोई शिकायत नहीं की।

ऐसा नहीं हो सकता कि जब आप चुनाव जीतें तो चुनाव प्रणाली ईमानदार हो और जब हार जाएं तो उसी प्रणाली में धांधली होने का आरोप लगाएं।’’ पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारियों में भारत सरकार के पूर्व सचिव, पूर्व राजदूत, पूर्व पुलिस महानिदेशक, राज्यों के पूर्व मुख्य सचिव और आयकर विभाग के पूर्व महानिदेशक भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया में होने वाली गलतियों को सुधारा जाना चाहिए, लेकिन इस प्रक्रिया की वैधता पर कोई संदेह नहीं है। उन्होंने कहा कि एसआईआर मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने और अपात्र मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया है तथा इस दौरान कुछ लोगों को असुविधा हो सकती है, लेकिन देश में लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में उठाए जाने वाले हर बड़े कदम के साथ ऐसा होता है।

पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल और भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी आर. डी. कपूर, समीरेंद्र चटर्जी, गोपाल कृष्ण, विवेक भारद्वाज और नवनीत सहगल के अलावा भारतीय विदेश सेवा की पूर्व अधिकारी भास्वती मुखर्जी एवं प्रभु दयाल तथा भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी के. अरविंद राव एवं सर्वेश चंद्र शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि भारत में चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों पर कब्जा करने, मतपेटियों में फर्जी मतपत्र डालने और हिंसा की घटनाओं का दौर पीछे छूट चुका है। उन्होंने कहा कि मौजूदा चुनाव प्रणाली में कई स्तरों पर जांच और सुरक्षा के इंतजाम हैं जिनमें मतदान एजेंटों की मौजूदगी, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) को सील करना, ‘स्ट्रांग रूम’ की सुरक्षा और ‘वोटर वेरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल’ (वीवीपैट) के जरिए सत्यापन शामिल है।

अधिकारियों ने पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव का उदाहरण दिया, जिसमें किसी भी मतदान केंद्र पर पुनर्मतदान नहीं कराना पड़ा और 1951 के बाद सबसे अधिक मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया। अधिकारियों ने निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि इसमें एक से अधिक निर्वाचन आयुक्त होने और संस्थागत सुरक्षा के प्रावधान इसकी निष्पक्षता सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘सवाल पूछना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन आरोप साबित करना आरोप लगाने वाले की जिम्मेदारी है।’’ एसआईआर की प्रक्रिया का समर्थन करते हुए अधिकारियों ने कहा कि मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने के लिए यह जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बिहार में करीब 22 लाख मृत मतदाताओं और सात लाख ऐसे मतदाताओं की पहचान की गई, जिनके नाम एक से अधिक बार दर्ज थे तथा करीब 21.5 लाख नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए। पत्र में कहा गया, ‘‘जिन मतदाता सूचियों को दुरुस्त नहीं किया जाता, वे मतदाताओं की नहीं, बल्कि धोखाधड़ी करने वालों की रक्षा करती हैं।’’ अधिकारियों ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया में नोटिस जारी करने, सुनवाई, अपील और राजनीतिक दलों के बूथ स्तरीय एजेंटों की भागीदारी जैसे सुरक्षा उपाय भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने इस प्रक्रिया की समीक्षा की है और अतिरिक्त सुरक्षा उपाय निर्धारित किए हैं।

 

Related Articles

Back to top button

mahjong ways

slot777