किसानों के लिए बड़ी खबर : फसल खराब होने पर मुआवजे का सर्वे होगा तेज, रबी में मिलेंगे मुफ्त बीज और मिनीकिट
बिगड़े मौसम से फसल खराब होने के बाद सरकार से मुआवजा की उम्मीद करने वाले किसानों को अब अधिक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। किसानों के लिए राहत की खबर है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अधिक क्षतिपूर्ति दावे वाले जिलों में सर्वे का काम तेज कराकर पात्र किसानों को तेजी से भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। महोबा, जालौन, ललितपुर, झांसी, चित्रकूट और मिर्जापुर में सर्वे और भुगतान की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा गया है। बृहस्पतिवार को कृषि भवन में कृषि विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों से जुड़ी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं के लिए निर्धारित बजट का समय से उपयोग करें और खुद मौके पर जाकर कृषि विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करें, ताकि काम की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।
रबी की बुवाई के लिए 12 लाख कुंतल बीज
रबी अभियान 2026-27 में किसानों को बीज उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में कुल 12 लाख कुंतल बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 10.45 लाख कुंतल गेहूं, 69.96 हजार कुंतल चना, 41.76 हजार कुंतल मसूर और 17.89 हजार कुंतल मटर का बीज शामिल है। इसके साथ ही किसानों को दलहन और तिलहन की खेती के लिए 7.65 लाख से अधिक निःशुल्क मिनीकिट दिए जाएंगे। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बीज वितरण और जिन जिलों में लक्ष्य बाकी है, उसे समय से पूरा किया जाए।
मसूर के बीज पर 100 फीसदी तक अनुदान
रबी 2026-27 में फसलों की प्रजातियों के अनुसार बीज पर अनुदान दिया जा रहा है। 8 वर्ष से कम अवधि की मसूर की सभी प्रजातियों पर 100 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। वहीं 8 वर्ष से कम अवधि के चना और मटर तथा 10 वर्ष से कम अवधि की मसूर की प्रजातियों पर 75 प्रतिशत अनुदान है। गेहूं, जौ, 10 वर्ष से कम अवधि के चना और मटर, 15 वर्ष से कम अवधि की तोरिया तथा राई-सरसों की सभी प्रजातियों पर अधिकतम 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।
रबी की बुवाई में खाद की नहीं हो परेशानी
रबी की बुवाई के दौरान किसानों को उर्वरक की उपलब्धता में परेशानी न हो, इसके लिए कृषि विभाग ने खाद की स्थिति की भी समीक्षा की। प्रदेश में सालाना 68.50 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। अब तक 34.19 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया जा चुका है। इसमें 16.12 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 6.76 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 5.58 लाख मीट्रिक टन एनपीके शामिल है। कृषि मंत्री ने सहकारिता और निजी क्षेत्र में उर्वरक की उपलब्धता और वितरण पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
कृषि योजनाओं के बजट का समय से होगा इस्तेमाल
बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 की योजनाओं की वित्तीय प्रगति की भी समीक्षा हुई। कृषि विभाग के लिए 10,017.45 करोड़ रुपये का बजट प्राविधान किया गया है। इसमें से 5,085.51 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति जारी हो चुकी है और अब तक 2,946.84 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। योजनाओं के स्तर पर 8,386.94 करोड़ रुपये के प्राविधान में से 3,455.61 करोड़ रुपये की स्वीकृति के सापेक्ष 2,393.66 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यह स्वीकृति के सापेक्ष 69.27 प्रतिशत की वित्तीय प्रगति है। कृषि मंत्री ने बची धनराशि का समयबद्ध उपयोग करने और केंद्र एवं राज्य पोषित योजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।



