Congress नेता P Chidambaram बोले, पद छोड़ें CEC Gyanesh Kumar, INDIA Bloc का विरोध रहेगा जारी
सीनियर कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तुरंत इस्तीफ़ा देने की मांग की है। यह मांग वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया, जिसे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) कहा जाता है, को लेकर उठ रही अंदरूनी आपत्तियों के बीच की गई है। 3 अक्टूबर को चिदंबरम ने कहा कि विपक्ष के बढ़ते दबाव के कारण कुमार का पद छोड़ना तय है।
उन्होंने कहा कि मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि ज्ञानेश कुमार को कभी न कभी इस्तीफ़ा देना ही होगा। उनके लिए जल्द इस्तीफ़ा देना बेहतर होगा, लेकिन अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो विरोध जारी रहेगा। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जब तक कुमार पद नहीं छोड़ते, तब तक ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन और कई सिविल सोसाइटी समूह अपना विरोध प्रदर्शन और तेज़ करेंगे।
चिदंबरम ने कहा कि INDIA गठबंधन का विरोध जारी रहेगा। दूसरे समूह भी विरोध कर रहे हैं और उन्हें इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उनके लिए सबसे समझदारी भरा काम यही होगा कि वे अभी इस्तीफ़ा दे दें। चिदंबरम ने कई राज्यों में वरिष्ठ चुनाव अधिकारियों से जुड़े हालिया घटनाक्रमों का ज़िक्र किया।
उन्होंने महाराष्ट्र और कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) के बयानों और ओडिशा के CEO द्वारा समय से पहले रिटायरमेंट के लिए दिए गए आवेदन का हवाला दिया। उन्होंने पूरे भारत में राज्य-स्तरीय चुनाव अधिकारियों से अपील की कि वे न्यायिक जांच शुरू होने से पहले ही जानकारी सामने लाएं।
उन्होंने कहा कि इससे पहले कि दूसरे हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जांच शुरू करें या सभी राज्यों के CEOs को बुलाएं, मैं उनसे अपील करूंगा कि वे खुलकर बोलें-उन्हें क्या निर्देश मिले, कब मिले और उन्होंने उनका पालन कैसे किया… यह साफ़ है कि SIR प्रक्रिया ग़ैर-कानूनी है। क्या उन्होंने इस बात की ओर इशारा किया था? इशारा करने के बावजूद, क्या चुनाव आयोग या मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनकी बात को नज़रअंदाज़ कर दिया? उन्हें अभी बोलना चाहिए। यही बोलने का समय है।
इस सवाल पर कि क्या इस्तीफ़े की मांग चुनाव आयोग के दूसरे सदस्यों के लिए भी है, चिदंबरम ने साफ़ किया कि विपक्ष का फ़ोकस अभी सिर्फ़ उन मामलों पर है जिनके लिए सबूत मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि अगर हमें पता चलता है कि बाकी दो चुनाव आयुक्तों की भूमिका भी संदिग्ध या ग़ैर-क़ानूनी है, तो हम उनसे भी इस्तीफ़े की मांग करेंगे। लेकिन फ़िलहाल, ऐसा कोई सबूत नहीं है। चिदंबरम ने संवैधानिक स्वायत्तता का हवाला देकर कुमार को बचाने की कथित कोशिश के लिए सरकार की आलोचना भी की।



