ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई तेहरान पर हुए अमेरिकी हमलों के दूसरे दौर में बच गए। इससे पहले, शुरुआती हमलों में उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी और मोजतबा घायल हो गए थे। 56 वर्षीय मोजतबा को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है, जिससे उनकी सेहत और ठिकाने को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। ईरान की असेंबली ऑफ़ एक्सपर्ट्स के सदस्य मोहसिन हैदरी ने कहा कि हमलों के बाद मोजतबा को तेहरान के एक अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन जब उस अस्पताल पर बमबारी हुई तो वे एक और हमले की चपेट में आ गए। हैदरी ने कतरी टेलीविज़न नेटवर्क अल अरबी को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि बाद में उन्हें मलबे से बाहर निकाला गया। हेदरी ने कहा उनके घायल होने और अस्पताल ले जाए जाने के बाद भी तेहरान के तीन अस्पतालों पर बमबारी की गई। मोजतबा खामेनेई तीसरे अस्पताल में थे और उन्हें मलबे से बाहर निकाला गया।
सुप्रीम लीडर के तौर पर मुज्तबा का चयन
मुज्तबा को उनके पिता की मौत के 10 दिन बाद, 8 मार्च को ईरान का सुप्रीम लीडर घोषित किया गया। देश के सुप्रीम लीडर को चुनने की ज़िम्मेदारी संभालने वाली ‘असेंबली ऑफ़ एक्सपर्ट्स’ ने अली खमेनेई के उत्तराधिकारी को चुनने के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच एक गुप्त बैठक की। हैदरी ने बताया कि अमेरिकी हमलों में असेंबली के क़ोम स्थित सचिवालय को भी निशाना बनाया गया था, जिसमें आठ लोग मारे गए और उत्तराधिकार प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज़ नष्ट हो गए। उन्होंने बताया कि बाद में सदस्यों ने कागज़ पर अपने वोट लिखे और उन्हें एक गुप्त बैठक के लिए बुलाया गया, जिसके स्थान या उद्देश्य के बारे में उन्हें पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी। हेदरी ने कहा कि उन्होंने ही सबसे पहले मोजतबा का नाम प्रस्तावित किया था और असेंबली ने तय किया कि वह धार्मिक और नेतृत्व संबंधी ज़रूरतों को पूरा करते हैं। हेदरी के अनुसार, मोजतबा को कुल 59 वोटों में से 50 वोट मिले। आठ सदस्यों ने अयातुल्ला अलीरेज़ा अराफ़ी के पक्ष में वोट दिया, जबकि एक सदस्य ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। हेदरी की हालिया जानकारी से हमलों के बाद मोजतबा की गतिविधियों के बारे में कुछ दुर्लभ जानकारी मिलती है, लेकिन उनके मौजूदा ठिकाने और स्वास्थ्य के बारे में अभी भी स्पष्टता नहीं है। ईरानी और अमेरिकी अधिकारियों के विरोधाभासी दावों के बावजूद, मोजतबा के लंबे समय से सार्वजनिक रूप से दिखाई न देने के कारण अटकलें लगाई जा रही हैं।