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SARFAROSHI KI TAMANNA अब हमारे दिल में है

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राम प्रसाद बिस्मिल (Ram Prasad Bismil) भारत के महान क्रान्तिकारी व अग्रणी स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, अपितु उच्च कोटि के कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाभाषी, इतिहासकार व साहित्यकार भी थे जिन्होंने भारत की आजादी के लिये अपने प्राणों की आहुति दे दी।

SARFAROSHI KI TAMANNA अब हमारे दिल में है

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Ram Prasad ‘Bismil’ (Born on 11 June 1897 at Shahjahanpur): – Freedom Fighter, patriotic poet (Hindi & Urdu), participated in Kakori conspiracy.
राम प्रसाद बिस्मिल (Ram Prasad Bismil) द्वारा हिन्दी में लिखी गई कविता सरफरोशी की तमन्ना प्रस्तुत है।

सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना, बाज़ू-ए-क़ातिल में है

एक से करता नहीं क्यूँ, दूसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे, वो चुप तेरी महफ़िल में है
ऐ शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत, मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चर्चा, ग़ैर की महफ़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है

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वक़्त आने पर बता देंगे तुझे, ए आसमां,
हम अभी से क्या बताएँ, क्या हमारे दिल में है
खेँच कर लाई है सब को, क़त्ल होने की उम्मीद,
आशिक़ोँ का आज जमघट, कूचा-ए-क़ातिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है

है लिए हथियार दुशमन, ताक में बैठा उधर,
और हम तैयार हैं, सीना लिये अपना इधर.
ख़ून से खेलेंगे होली, गर वतन मुश्किल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

हाथ, जिन में हो जुनून, कटते नहीं तलवार से,
सर जो उठ जाते हैं वो, झुकते नहीं ललकार से.
और भड़केगा जो, शोला सा हमारे दिल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है

हम तो घर से ही थे निकले, बाँधकर सर पर कफ़न,
जाँ हथेली पर लिये लो, बढ़ चले हैं ये कदम
जिन्दगी तो अपनी मेहमाँ, मौत की महफ़िल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है

यूँ खड़ा मक़्तल में क़ातिल, कह रहा है बार-बार,
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी, किसी के दिल में है?
दिल में तूफ़ानों की टोली, और नसों में इन्क़िलाब,
होश दुश्मन के उड़ा देंगे, हमें रोको न आज.
दूर रह पाए जो हमसे, दम कहाँ मंज़िल में है,

जिस्म भी क्या जिस्म है, जिसमें न हो ख़ून-ए-जुनून
क्या लड़े तूफ़ान से जो, कश्ती-ए-साहिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना, बाज़ू-ए-क़ातिल में है

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