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राज्य ललित कला अकादमी का 60वां स्थापना दिवस

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  • ‘चैारी-चैारा जन आंदोलन है हमारी शौर्यगाथा’
  • कल होगा लोक कलाओं के मंच प्रदर्शन के साथ समापन
लखनऊ। राज्य ललित कला अकादमी के 60वें स्थापना दिवस पर सोमवार आठ फरवरी से 10 फरवरी तक चलने वाले त्रिदिवसीय कला रंग महोत्सव का आज दूसरा दिन था। छतरमंजिल में आयोजित समारोह में आज अतिथियों ने कलाकारों को पुरस्कृत किया। उन्होंने महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री के विचारों पर आधारित चित्रकला-मूर्तिकला प्रतियोगिता और लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर एकता दिवस विषयक चित्रकला-मूर्तिकला प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। छतर मंजिल परिसर में संपन्न हो जायेगा।
लाल बारादरी भवन कलादीर्घा में 34वीं कला प्रदर्शनी फरवरी मध्य तक जारी रहेगी। अतिथि विधायक महेंद्र सिंह यादव ने कहा कि कला जीवन जीना सिखाता है और जीवंत रहना भी। इस सरकार ने चौरी-चौरा जनआंदोलन की शौर्यगाथा को शताब्दी वर्ष के तहत सामने लाने का प्रयास किया है। भारतेंदु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष रविशंकर खरे ने कहा कि मुझे गर्व है कि मुझे मैं उस शहर से हूं, जहां चौरी-चौरा घटना घटी थी। इस शौर्यगाथा को अकादमी नये रुप से सामने रखेगी। 75 जिलों में चौरीचौरा घटना पर आधारित नाटक होंगे।
अकादमी सचिव डॉ यशवंत सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया आभार जताया। विश्व संवाद केंद्र के प्रमुख अशोक सिन्हा ने चौरी-चौरा जन आंदोलन की कहानी बताते हुए कहा कि कला संस्कृति समाज को जोड़ती है। यहां सृजित हो रहीं कृतियां नये भारत का निर्माण में सहायक होंगी। सिन्धी अकादमी के उपाघ्यक्ष नानक चंद लखमानी ने चौरी-चौरा घटन को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर बधाई दी। अकादमी अध्यक्ष सीताराम कश्यप और उपाध्यक्ष गिरीश चंद्र मिश्र और सचिव डॉ यशवंत सिंह राठौर ने आयेाजन के विषयों पर प्रकाश डाला आभार जताया।
आज के समारोह में अकादमी द्वारा महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री जयंती के अवसर पर पिछले वर्ष दो अक्टूबर को उनके कृतित्व, विचार व संदेशों पर आधारित ऑन लाइन चित्रकला व मूर्तिकला प्रतियोगिता में मिलीं प्रविष्टियों की 111 कलाकृतियों की सराहना हुई। इसके दस कलाकारों आशा वाराणसी, आकाश गुप्ता मऊ, अनुज मिश्र चित्रकूट, जूली कुमारी भागलपुर, कुंवर श्रीवास्तव बस्ती, साक्षी अग्रवाल चित्रकूट, शिवम कुमार सेठ वाराणसी, शिवम गुप्ता वाराणसी, श्वेता विश्वकर्मा मऊ और वंदना कोरी प्रतापगढ़ को उनकी उत्कृष्ट कृतियों के लिये सम्मानराशि व प्रतीक चिन्ह, प्रमाण पत्र देकर प़ुरस्कृत किया।
इसके बाद अकादमी की ओर से लौहपुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस पर आधारित पिछले वर्ष्र 27 अक्टूबर को हुई ऑन लाइन चित्रकला व मूर्तिकला प्रतियोगिता के चयनित 10 कलाकारों अंकिता वाराणसी, दिवाकर आर्य बरेली, पिंकी आगरा, नगमा शेख वाराणसी, सौरभ श्रीवास्तव वाराणसी, सुमित कुमार अलीगढ़, वीरेंद्र श्रीलाल इटावा, पवन कुमार विश्वकर्मा प्रयाग राज, आराधना कुमारी सारण बिहार और शिवम सिंह प्रजापति प्रयागराज को उनकी कृतियों के लिये ढाई हजार की पुरस्कार राशि, प्रतीक चिन्ह व प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया गया।
महोत्सव में चित्रकारों ने चौरी चौरा घटना पर आधारित चित्रों की रचना जारी रखी । चित्रकार शिविर में प्रतिभागियों के बनाये बने चित्रों में आकृतियां उभर आईं। आर्ट गैलरी में विभिन्न प्रतियोगिताओं की उत्कृष्ट कलाकृतियों की प्रदर्शनी का कलाप्रेमियों ने सराहना की। अयोध्या, कानपुर, बरेली, सहारनपुर, आगरा, झांसी, वाराणसी, प्रयागराज, बस्ती और राजधानी लखनऊ की संस्थाओं की प्रदर्शनी जारी रही। 10 फरवरी तक चलने वाली इन प्रदर्शनियों में बिक्री के लिए भी उपलब्ध अनेक कृतियों में से कुछ कृतियां बिक भी गईं। लाल बारादरी भवन की दीर्घा में जारी 34वीं राज्य स्तरीय प्रदर्शनी की कला कृतियों को कलाप्रेमियों ने निहारा।

युग के वाल्मीकि को तब रामायण लिखना पड़ता है…

ऐतिहासिक छतर मंजिल परिसर में महोत्सव के सांस्कृतिक मंच पर एक शाम शहीदों के नाम शीर्षक काव्य समारोह हुआ। कमलेश मौर्य मृ्दु ने ‘साधना को शक्ति देती वह कला है, भावना के भक्ति देती वह कला है…’ रचना पढ़ी। तो बाराबंकी के संजय सांवरा ने ‘मातृ वंदना का जो स्वर हो गये, ऋण धरा का चुकाकर अमर हो गये…’ रचना पढ़कर प्रभावित किया। लखनऊ की रेनू द्विवेदी ने देशभक्त सच्चे कहलाये कभी झुकाया न सर, फांसी के फंदे पर लटके नया क्षितिज स्थापित कर…’, सीतापुर के पदमकांत शर्मा प्रभात ने ‘देश के लिए हुए हवन, कोटि-कोटी हैं उन्हें नमन…’, कानपुर के कमलेश द्विवेदी ने ‘देश के लिए हुए शहीद भगत सिंह शेखर हमीद…’ और विख्यात मिश्र ने तुमसे तिरछी नजर देश पर यदि उठी, वीर बढ़कर के बलिदानी हो जाये…’ कविताएं पढ़कर लोगों में देशभक्ति की भावना भरी। उन्नाव की प्रियंका शुक्ला ने ‘देश पर जो मर मिटे उन क्रांतिदूतों को नमन है…’, मैनपुरी के रामनेश पाल ने ‘वक्त अच्छा हो या बुरा कट ही जाता है, कोहरा कितना ही घना हो छंट ही जाता है…’ और बाराबंकी के शिवकुमार व्यास ने ‘हर युग का अंत यही रावण को मिटना पड़ता है…, युग के वाल्मीकि को तब रामायण लिखना पड़ता है…, कविताएं सुनाकर लोगों की प्रशंसा पाई।

10 फरवरी के कार्यक्रम

  • प्रातः 11.00 बजे – 34वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी, लाल बारादरी भवन कलादीर्घा में
  • प्रातः 11.00 बजे – प्रदेश की विविध कला संस्थाओं की 20 कला प्रदर्शनियां व पुरस्कृत कृतियों की प्रदर्शनी, छतर मंजिल परिसर में
  • अपराह्न 2.30 बजे- कोविड-19 पर आधारित प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण समारोह
  • शाम 5.30 बजे – लोक गायन मगन मिश्र-लखनऊ, लोक गायन ध्रुव-लखनऊ, नृत्य प्रस्तुतियां उर्मिला पाण्डेय-गोण्डा, छतर मंजिल परिसर में

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