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आयुष्मान योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा

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प्रयागराज: गरीबों के लिए मुफ्त इलाज के लिए शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना में एक और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. ये फर्जीवाड़ा संगम नगरी प्रयागराज में पकड़ा गया है, जहां दो प्राइवेट अस्पतालों ने बिना किसी मरीज को भर्ती किये फर्जीवाड़े के ज़रिये लाखों रूपये की सरकारी रकम हड़प ली है.

जिन लाभार्थियों के नाम पर यहां फर्जीवाड़ा किया गया है, उन सभी के नाम-पते और मोबाइल नंबर भी फर्जी मिले हैं. जिन नामों और कार्ड संख्या के आधार पर प्रयागराज में फर्जी मरीजों का इलाज किया गया है, उन्हीं पर तकरीबन एक ही वक़्त में मिजोरम-मणिपुर, कर्नाटक और केरल में भी इलाज दिखाकर वहां के अस्पतालों ने भी क्लेम किया है.

ख़ास बात यह है कि जिले से लेकर स्टेट तक के अफसरों और एजेंसियों ने सब कुछ ओके बताकर प्राइवेट अस्पतालों को लाखों रूपये की रकम भी दिलवा दी. कई दूसरे राज्यों में भी इसी नाम और कार्ड नंबर का इस्तेमाल होने की वजह से यह फर्जीवाड़ा केंद्र सरकार की मॉनिटरिंग कमेटी ने पकड़ा है. प्रयागराज के इन दो निजी अस्पतालों पर अब एक करोड़ रूपये का जुर्माना लगाया गया है.

इतना ही नहीं यूपी सरकार ने इस मामले में गड़बड़ी करने वाले अस्पतालों को सील करने और उनके संचालकों व दूसरे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किये जाने के भी आदेश दिए हैं. सवाल यह उठता है कि इस तरह का फर्जीवाड़ा सिर्फ निजी अस्पतालों के संचालक और दलाल अकेले मिलकर कर लेते हैं या फिर इसमें सरकारी महकमे की शह व मिलीभगत भी होती है.

बहरहाल, फर्जीवाड़े के इस खुलासे से प्रयागराज में हड़कंप मचा हुआ है. यहां के अफसरों ने इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की आशंका से इंकार नहीं किया है, क्योंकि देश के पांच राज्यों में एक ही नाम और नंबर का इस्तेमाल कर लाखों की रकम का फर्जीवाड़ा करना इतना आसान भी नहीं है. बहरहाल कहा जा सकता है कि गरीबों के कल्याण के लिए शुरू किये गए पीएम नरेंद्र मोदी का यह ड्रीम प्रोजेक्ट बेईमानों और भ्रष्टाचारियों के लिये लूट-खसोट करने का ज़रिये भी बन गया है.

दोनों अस्पताल शहर के धूमनगंज इलाके में

प्रयागराज में जिन दो निजी अस्पतालों में यह फर्जीवाड़ा पकड़ में आया है, वह दोनों शहर के धूमनगंज इलाके में है. इनमे पहला है डॉक्टर मुकेश टंडन द्वारा संचालित दयाल नर्सिंग होम और दूसरा है डाक्टर उमेश कुमार द्वारा संचालित ईशा हास्पिटल. यह दोनों ही अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत लाभार्थियों के मुफ्त इलाज के लिए नामित किये गए थे. पिछले साल अक्टूबर महीने में दयाल नर्सिंग होम ने एक दर्जन मरीजों के कूल्हा प्रत्यर्पण व दूसरी बीमारियों के बड़े ऑपरेशन का दावा करते हुए आयुष्मान योजना के तहत इलाज के खर्च का क्लेम किया था.

जिले से लेकर सूबे के स्वास्थ्य महकमे और यूपी की मॉनिटरिंग एजेंसी ने इस क्लेम पर मुहर लगा दी तो पैसे का भुगतान भी हो गया. सेंट्रल मॉनिटरिंग एजेंसी ने जब इसे अपने पोर्टल पर चढ़ाना चाहा तो एक ही नाम और कार्ड नंबर पर तकरीबन एक ही वक़्त में देश में पांच राज्यों की तरफ से क्लेम किये जाने और भुगतान पाने का खुलासा हुआ. कुछ ऐसा ही ईशा हॉस्पिटल के मामले में भी हुआ. यहां भी फर्जीवाड़ा किया गया था. इसके बाद केंद्रीय टीम ने स्टेट और जिले के अफसरों के साथ दोनों निजी अस्पतालों में जांच की. जांच में पता चला कि कूल्हा प्रत्यर्पण जैसे जटिल ऑपरेशन के लिए न तो इन अस्पतालों में आपरेशन थियेटर है और न ही कोई दूसरी सुविधा. इसके लिए ज़रूरी डिजिटल एक्सरे मशीन तक नहीं है. हालांकि कागज़ में सारे रिकॉर्ड दुरुस्त रखे गए थे.

दोनों निजी अस्पतालों को सील करने के आदेश

जिन डॉक्टर्स द्वारा ऑपरेशन व इलाज कराने का दावा किया गया था, उन्होंने उन तारीखों में घर में ही क्वॉरंटीन रहने या फिर शहर से बाहर होने की जानकारी दी. जांच में लाभार्थियों के नाम पते फर्जी पाए गए. सारे मोबाइल नंबर या तो बंद थे या फिर वह आउट ऑफ सर्विस थे. जांच में यह साफ़ हो गया कि किसी बड़े रैकेट की मिलीभगत से यहां बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है.

जांच में दयाल नर्सिंग होम में छह मामलों और ईशा हॉस्पिटल में दो मामलों का फर्जीवाड़ा साफ़ पकड़ में आया. इसी वजह से जिले के अफसरों ने दयाल नर्सिंग होम पर 89 लाख और ईशा हॉस्पिटल पर 11 लाख रूपये का जुर्माना लगाया है. इतना ही नहीं इन दोनों निजी अस्पतालों को सील करने और संचालकों व मिलीभगत में शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने के भी आदेश दिए गए हैं. हालांकि दोनों अस्पतालों के संचालकों ने खुद को बेगुनाह बताते हुए गोल मोल दलीलों के ज़रिये अपनी सफाई पेश की है.

प्रयागराज में आयुष्मान योजना के नोडल अफसर एडिशनल सीएमओ डॉ रमेश चंद्र पांडेय ने इस फर्जीवाड़े के ज़रिये किसी बड़े नेटवर्क का हाथ होने की आशंका जताई है. जिले में आयुष्मान के कार्यक्रम अधिकारी डॉ रवींद्र यादव का कहना है कि केंद्रीय मॉनिटरिंग एजेंसी की सजगता की वजह से ही यह फर्जीवाड़ा पकड़ में आ सका है, वर्ना इसका तो भुगतान तक हो चुका था.

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