A Symbol of Boldness.

- Advertisement -

मां नंदा के छोटे भाई लाटू देवता के कपाट खुले

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज रहे मौजूद।

0

चमोली 26 अप्रैल। हिमालय की आराध्य मां नंदा के धर्मभाई माने जाने वाले लाटू देवता के कपाट साल भर में मात्र एक दिन के लिए खोले जाते हैं। पुजारी जहां आंखों पर पट्टी बांधकर पूजा करते हैं वहीं श्रद्धालु भी बाहर से ही देवता के दर्शन कर सकते हैं। मंदिर के अंदर देवता किस रूप में विराजमान हैं, यह आज भी रहस्य बना हुआ है।

देवाल ब्लाक के वाण गांव में स्थित लाटू देवता मंदिर के कपाट सोमवार को शुभमुहूर्त अपराह्न 2.05 बजे पूरे विधि विधान के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए।  मान्यता है कि लाटूू  देवता  मां नंदा  के छोटे भाई हैंं।

इस अवसर पर उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री श्री सतपाल महाराज भी मौजूद रहे। कपाट खुलने पर भक्तों ने लाटू देवता की पूजा-अर्चना कर पुण्य अर्जित किया।

सोमवार सुबह से वाण स्थित लाटू मंदिर में विधि विधान से कपाट खोलने प्रकिया शुरू हुई। लग्नानुसार मंदिर के पुजारी खीम सिंह ने पवित्र कुंड में स्नान कर आंख में पट्टी बांधकर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया।

मंदिर के पंडित उमेश चंद्र कुनियाल एवं रमेश कुनियाल द्वारा वेद मंत्रोच्चारण कर यज्ञ हवन कर मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद देवनृत्य हुआ। लाटू के पश्वा ने भक्तों को प्रसाद स्वरूप आर्शीवाद दिया। कोविड महामारी के चलते इस बार कपाट खुलने के समय सीमित संख्या में ही ग्रामीण मौजूद रहे।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने लाटू देवता की पूजा अर्चना करते हुए प्रदेश और देश को कोरोना महामारी से बचाने की कामना की। उन्होंने आम जनता से भी कोविड के नियमों का पालन करने, शारीरिक दूरी बनाए रखने, नियमित रूप से मास्क पहनने और कोविड वैक्सीन जरूर लगवाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि अपने देश और परिवार को स्वस्थ्य रखना है तो हम सबको वैक्सीन जरूर लगानी चाहिए। पर्यटन मंत्री ने कहा कि क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के वाण पहुॅचने पर थराली विधायक मुन्नी देवी शाह, देवाल ब्लाक प्रमुख दर्शन दानू, थराली के पूर्व प्रमुख राकेश जोशी, मंडल महामंत्री उमेश मिश्रा, प्रधान संघ अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह बिष्ट, पिंडारी संघर्ष समिति के अध्यक्ष इंद्र सिंह राणा, किशन दानू, थराली एसडीएम सुधीर कुमार, थानाध्यक्ष डीएस पंवार, लाटू मन्दिर समिति के अध्यक्ष कृष्णा सिंह, ग्राम प्रधान पुष्पा देवी आदि गणमान्य नागरिकों ने भव्य स्वागत किया।

उल्लेखनीय है कि लाटू देवता के प्रति अटूट आस्था के चलते दूर-दूर से श्रद्धालुओं के आने का तांता लगा रहता है। हिमालयी महाकुंभ नंदा देवी राजजात यात्रा का ये आखिरी पड़ाव है, इसके बाद निर्जन पड़ाव शुरू हो जाते हैं। रूपकुंड, बेदनी बुग्याल और आली बुग्याल का बेस कैंप वाण गांव है।

लाटू देवता के मंदिर के अंदर क्या है, किसी को नहीं मालूम। बारह बरस बाद जब नंदा मायके (कांसुवा) से ससुराल (कैलाश) जाते हुए वाण पहुंचती हैं, तब इस दौरान नंदा का लाटू से भावपूर्ण मिलन होता है। इस दृश्य को देख यात्रियों की आंखें छलछला जाती हैं।

यहां से लाटू की अगुआई में चैसिंग्या खाडू के साथ राजजात होमकुंड के लिए आगे बढ़ती है। लेकिन, वाद्य यंत्र राजजात के साथ नहीं जाते। वहीं मान्यता है कि वाण में ही लाटू सात बहनों (देवियों) को एक साथ मिलाते हैं। लाटू देवता पूरे पिंडर दशोली(आंशिक) क्षेत्र के ईष्टदेव हैं। दूर-दूर से लोग अपनी मनोकामना लेकर लाटू के मंदिर में आते हैं।

डा. हरीश गौड़

- Advertisement -

- Advertisement -

Leave A Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More