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मुख्तार को कोर्ट लाने वाली एंबुलेंस, विधायक निधि से खरीदी गई थी

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लखनऊ – पूर्वांचल के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी ने बीमार और जरूरतमंदों के लिए विधायक निधि से एंबुलेंस खरीदी थी। एंबुलेंस का बाराबंकी के आरटीओ में रजिस्ट्रेशन भी ऐसा ही कुछ बताकर मुख्तार ने कराया था। बाद में उसने मॉडिफाई कराकर एंबुलेंस को बुलेट प्रूफ बनवाया। पूर्व डीजी एके जैन ने इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अगर ठीक से जांच कराई तो हैरतअंगेज खुलासे होंगे।

पूर्व डीजी एके जैन की मानें तो एक जनप्रतिनिधि (विधायक) बीमार व जरूरतमंदों के लिए एंबुलेंस विधायक निधि से खरीद सकता है। लेकिन वह इसका इस्तेमाल खुद अपने फायदे के लिए नहीं कर सकता और ना ही एंबुलेंस के स्वरूप को परिवर्तित करा सकता है। साथ ही एंबुलेंस किसी सरकारी या निजी हॉस्पिटल के नाम ही खरीदी जा सकती है। शायद इसीलिए बाहुबली विधायक ने अपने विधानसभा क्षेत्र स्थित श्याम संजीवनी हॉस्पिटल की मालकिन अलका राय को चुना।

मऊ जनपद में श्याम संजीवनी हॉस्पिटल की मालकिन अलका राय की मानें तो मुख्तार अंसारी हमारे विधानसभा क्षेत्र के विधायक है। उन्होंने वर्ष 2009-10 में एंबुलेंस संबंधी कागजात भेजे और कहा-उस पर साइन कर दें. बीमार लोगों की मदद के लिए एम्बुलेंस खरीद रहा हूं। जो सिर्फ किसी हॉस्पिटल के नाम ही निकल सकती है। जिस पर मेरे भाई हॉस्पिटल के डायरेक्टर ने साइन किए. यह बहुत साल पुराना मामला है। आप लोगों से इसकी जानकारी मिली है।

इसके अलावा बाराबंकी एआरटीओ के मुताबिक UP41 AT 7171 नंबर की जिस एंबुलेंस का इस्तेमाल मुख्तार अंसारी के लिए हुआ है, उसकी साल 2015 में ही रजिस्ट्रेशन की मियाद खत्म हो चुकी है. इसके अलावा एंबुलेंस की फिटनेस भी साल 2017 में ही एक्सपायर हो चुकी है, जबकि 20 जनवरी 2020 को इस गाड़ी के रिन्यूअल के लिए एक नोटिस भेजा गया था, जिस पर कोई जवाब न आने के बाद अब गाड़ी को सीज करने की कार्रवाई की जानी थी।

बड़ा सवाल ये है कि क्या जानबूझकर मऊ के श्याम संजीवनी हॉस्पिटल के नाम से एंबुलेंस का रजिस्ट्रेशन कराया गया। जिससे पूरे सिस्टम को मुंह चिढ़ाया जा सके।

वहीं बाराबंकी के जिस मोहल्ले रफीनगर के हॉस्पिटल श्याम और डॉक्टर अलका राय का एंबुलेंस की आरसी में जिक्र है। वह भी मौके पर नहीं है। मोहल्ले के स्थानीय निवासियों का कहना है कि वह लोग बचपन से ही यहां रह रहे हैं और न तो कभी यहां ऐसा कोई हॉस्पिटल था और न ही इस नाम की कोई डॉक्टर ही थी।

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