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जीवन जीने की कला है Yoga : डॉ नीलम महेन्द्र

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जीवन जीने की कला है Yoga : डॉ नीलम महेन्द्र

NIS Desk Team June 20, 2018
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कहा जा सकता है कि इस दिन Yoga विद्या का धरती पर अवतरण हुआ था,और इसीलिए विश्व योग दिवस मनाने के लिए इससे बेहतर कोई और दिन हो भी नहीं सकता था। जब 2015 में भारत में पहला Yoga Day मनाया गया था तो प्रधानमंत्री मोदी और 84 देशों के गणमान्य व्यक्तियों ने इसमें हिस्सा लिया था और 21 योगासन किए गए थे।

जिसमें 35985 लोगों ने एक साथ भाग लिया था। लेकिन इन सारी बातों के बीच हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जब हम कहते हैं कि Yoga केवल शरीर ही नहीं मन और आत्मा का शुद्धिकरण करके हमें प्रकृति, ईश्वर और स्वयं अपने नजदीक भी लाता है, तो यह भी जान लें कि ‘योगासन’, “अष्टांग योग” का एक अंग मात्र है।

वो Yoga जो शरीर के भीतर प्रवेश करके मन और आत्मा का स्पर्श करता है वो आसनों से कहीं अधिक है। उसमें यम और नियम का पालन, प्राणायाम के द्वारा सांसों यानी जीवन शक्ति पर नियंत्रण,बाहरी वस्तुओं के प्रति त्याग,धारण यानी एकाग्रता,ध्यान अर्थात चिंतन और अन्त में समाधि द्वारा योग से मोक्ष प्राप्ति तक के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

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