PanchTantra की कहानी-बेकार का पचड़ा-भाग-11

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पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-10 में आपने पढ़ा कि ……..

पिता के संपर्क में रह कर जो कुछ मैंने सीखा है उसका एक भेद यही है कि जो बिना अवसर के ही कोई बात कह बैठता है वह यदि बृहस्पति की तरह परम विद्वान हो तो भी उसका अपमान होकर ही रहता है।

अब इससे आगे पढ़िए, भाग-11 …………

करटक को दमनक की योग्यता में विश्वास तो था पर वह अपने ज्ञान और अनुभव से इस नतीजे पर
पहुंचा हुआ था कि राजा पहाड़ की तरह होता है। जैसे पहाड़,(Snake) सांप-बिच्छू आदि प्राणियों से भरे होते हैं, उसी तरह राजा के दरबार में मौका पाकर डंसने वालों की कमी नहीं होती। पहाड़ ऊंचे-नीचे होते हैं और राजा तक पहुंचने में भी बहुत से उतार चढ़ाव देखने पड़ते हैं।

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