PanchTantra की कहानी-बेकार का पचड़ा-भाग-7

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पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-6 में आपने पढ़ा कि —……..

करटक एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रखने वालों में था। वह किसी काम में जल्दी नहीं करता था और पूरी बात समझे बिना कुछ करने को तैयार ही नहीं होता था। बोला, तुमने यह कैसे जान लिया कि इस समय वह डरा हुआ है?

अब इससे आगे पढ़िए, भाग-7…………

दमनक (Damanak) से बोला, हंसने लगा, इसमें जानने की क्या बात है? सब कुछ बता दो तो जानवर भी किसी बात को समझ लेता है। सियार और आदमी की समझ की कसौटी तो यह है कि वह देख कर ही ताड़ ले कि किसी के मन में क्या है।

2 COMMENTS

  1. kahani bahut achi hai iska ant kya hai kahani ki suru mandir banane va bandro se hai adhuri or bekar ka pachar bhi adhuri ase na ho adhuri kahani parakar net kabhij kharch dek lag kahne lage bekar ka pachra hai

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