PanchTantra-कान भरने की कला भाग-10

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panchatantra-10
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पिछले अंक के भाग-9 में आपने पढ़ा कि……………

कहने का मतलब यह है कि लड़के लिख लोढ़ा, पढ़ पत्थर थे। उनका मन शैतानी में अधिक लगता था। वे पढऩे की जगह अपने शिक्षकों को ही पाठ पढ़ाने और बनाने लगते। गुरुजी डांटते-डपटते तो उनकी छुट्टी करा देते। ……

इससे आगे भाग-10 में पढ़िए………कि…..

खाने-पीने की कमी तो थी नहीं इसलिए डट कर खाते और डकार लेतेl तरह-तरह के उधम मचाते हुए लड़के शरीर से मुस्टंड और दिमाग से बरबंड होते चले गए थे। राजा ने कड़े से कड़े बंधन लगाए और बड़े से बड़े शिक्षक बुलाए, पर कोई काम न बना।

अब वह थक चला था। वह इस बात से घुला जा रहा था कि उसके तीन के तीनों लड़के चौपट हो गए। उसे अपनी आखों के आगे अंधेरा छाता दिखाई दे रहा था। इस बात की चिंता होने लगी थी कि उसके बाद उसके इतने बड़े राज्य को संभालेगा कौन?

राजा बनेगा तो इन तीनों में से ही कोई। चौपट राजाओं की नगरी में कैसी अंधेर मचती है यह उसे मालूम था। यदि राजकुमारों को अब भी सुधारा नहीं गया तो प्रजा को उस अंधेरगर्दी से बचाया नहीं जा सकेगा। वह इसी बात को ले कर चिंतित था। उसे कहीं कोई रास्ता सुझाई नहीं दे रहा था।