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PanchTantra की कहानी-King-Pinglak भाग-14

PANCH TANTRA

PanchTantra की कहानी-King-Pinglak भाग-14

NIS Desk Team March 10, 2018
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पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-13 में आपने पढ़ा कि ……..

कहा तो यह भी गया है कि चाहे King कितने भी संपन्न हो, कितना भी कुलीन हो और चाहे उसे King का पद अपनी वंश-परंपरा से ही क्यों न मिला हो, यदि King गुण की परख नहीं कर पाता है या जानते हुए उसकी अनदेखी करता है तो उसका साथ उसके सेवक भी नहीं देते हैं। जब तक साथ रहते भी हैं तो मनमानी करते रहते हैं।

अब इससे आगे पढ़िए, भाग-14 …………

इतना ही नहीं, जो King गुणी व्यक्तियों में भी यह अंतर नहीं कर पाता कि कौन कितने पानी में है और किसको कितना ऊंचा पद मिलना चाहिए, जो समान गुण वाले सेवकों के साथ समान व्यवहार नहीं कर पाता या जो योग्य व्यक्तियों की तुलना अयोग्य व्यक्तियों से करता रहता है उसके सेवक भी उसको छोड़ कर चल देते हैं।

दमनक कहने लगा यदि आप जानना चाहें कि ऐसा होता क्यों है तो इसे समझना कठिन नहीं है। वे ऐसे स्वामी को मूर्ख या सिरफिरा समझने लगते हैं। उन्हें उसके अधीन काम करने में अपमान सा लगता है। इसमें दोष सेवक का नहीं, King का होता है।

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