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PanchTantra की कहानी-King & Damanak भाग-18

PANCH TANTRA

PanchTantra की कहानी-King & Damanak भाग-18

NIS Digital Team April 20, 2018
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पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-17 में आपने पढ़ा कि ……..

Damanak ने बताया कि महाराज, योग्य लोग तो कहीं भी पैदा हों, अपनी योग्यता से दुनिया को यह बात और दिखा ही देते हैं कि वे क्या हैं।

अब इससे आगे पढ़िए, भाग-18 …………

Damanak बोला, जन्म से कोई भी ऊंच-नीच नहीं होता। इसी तरह सेवक चुनते समय इस बात का भी कोई तुक नहीं कि कौन अपने परिवार का है और कौन बाहर का। चुहिया यदि अपने घर में ही पैदा हुई हो तो भी उसको मार डालना चाहिए, क्योंकि वह नुकसान छोड़ और कुछ नहीं कर सकती है। पर चूहों की सफाई करने वाली बिल्ली को पराए घर से भी लाकर पाला-पोसा जाना चाहिए।

Damanak ने सीधे तो नहीं कहा कि आप के आसपास मूर्खों और निकम्मों की भीड़ लगी है, जिनके ऊपर भरोसा नहीं किया जा सकता, लेकिन घुमा फिराकर वह कह यही रहा था। वह बोला भिंडी के डंठल, रेंड़ के तने, मदार और नरकुल के गठ्ठर से जिस तरह खंभा नहीं बनाया जा सकता उसी तरह मूर्खों की भीड़ जुटा लेने से अकल की एक बात भी नहीं निकाली जा सकती।

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