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PanchTantra की कहानी-King & Damanak भाग-16

PANCH TANTRA

PanchTantra की कहानी-King & Damanak भाग-16

NIS Digital Team April 4, 2018
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Damanak कहता जा रहा था, राजा अपने सेवकों से प्रसन्न होगा तो अधिक से अधिक उन्हें क्या देगा? पैसा ही न? पर राजा से आदर पाने वाले सेवक तो राजा के लिए अपने प्राण तक दे देते हैं।

अब Damanak बहाने-बहाने से अपनी धाक भी जमाने लगा, राजा को यह सब सोच कर ही अपने सेवक नियुक्त करना चाहिए कि वे बुद्घिमान, कुलीन और बहादुर तो हैं न। उनके कुल की रीति क्या रही है?

वे जिस काम पर लगाए गए हैं उसे कर भी सकते हैं या नहीं। वे राजा के प्रति निष्ठा तो रखते हैं? Damanak कहता है कि जो सेवक यह सोच कर कि इसमें राजा की भलाई है, कठिन से कठिन काम करने के बाद भी यह नहीं जताते कि उन्होंने कुछ किया भी है, दूसरों से इसका ढिढोरा नहीं पीटते, राजा को केवल उन्हीं के प्रति कृपा भाव रखना चाहिए।

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