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PATRIOTS

a person who vigorously supports their country and is prepared to defend it against enemies or detractors.

लोकनायक जयप्रकाश नारायण-1

जयप्रकाश ने देश से कुछ मांगा नहीं, सिर्फ दिया ही है। इसलिए देश उनके नैतिक अधिकार को मानता था। चंबल के खूंखार डकैतों को सरकार पकड़ नहीं सकी, लेकिन जयप्रकाश की नैतिकता के वशीभूत होकर उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया। इस तरह की कई घटनाएं हैं। कोई

स्वामी विवेकानन्द, पार्ट—1/2

रविवार के दिन प्रात: ही हेडो तालाब के किनारे, एक गोरा पादरी सड़क पर भाषण की मुद्रा में खड़ा था। वह मदारी के समान भीड़ इकठ्ठी हो जाने की प्रतीक्षा कर रहा था। छितरे छितरे से लोग इधर उधर आते जाते दिखाई पड़ रहे थे। कुछ उसके निकट आ गए थे। कुछ

स्वामी विवेकानन्द, पार्ट—1/1

स्वामी विवेकानन्द वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था।

डॉ0 बाबासाहेब आंबेडकर

संसार के महापुरुषों के चरित्रों का अध्ययन करते समय यह बात ध्यान में अवश्य आती है कि कोई भी व्यक्ति जन्म से महान नहीं होता। यह महानता उसे अपने जीवन में त्याग और परिश्रम की भारी पूंजी लगाकर प्राप्त करनी होती है। इसलिए महाभारत में कर्ण के मुख

लोकनायक जयप्रकाश नारायण

इस कॉलम में हम प्रस्तुत करने जा रहे हैं, देश और उसकी जनता के लिए तह तक ईमानदार एक महापुरूष की जीवनी।तो लीजिए प्रस्तुत है उनकी बानगी। स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे ज्यादा प्यार और सम्मान जिन दो नेताओं को मिला, वे थे -पंडित जवाहरलाल