PanchTantra की कहानी-बेकार का पचड़ा-भाग-4

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Panchtantra-Kartak
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पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-3 में आपने पढ़ा कि —…..

मित्र, अपना पेट तो सभी भर लेते हैं पर दुनिया का भला करने वाले सज्जन बहुत कम होते हैं। ऐसे लोगों का जीवन जेठ की तपन से झुलसते हुए संसार के संताप को हरने के लिए उमड़ पडऩे वाले मेघ के समान होता है।

अब इससे आगे पढ़िए, भाग-4…..

जानते हो मां को सबसे ऊपर क्यों कहा जाता है? इसलिए कि कभी-कभार उसके गर्भ से कोर्ई ऐसा लाल भी जन्म ले लेता है जो महान लोगों के लिए भी आदर्श बन जाता है।

करटक ( kartak ) अब भी चुपचाप सुन रहा था। यह पता नहीं चल रहा था कि उसके मन पर क्या बीत रही है। दमनक ने कुछ खीझ कर कहा, देखो करटक ( kartak ), जो व्यक्ति लाचार होता है उसका तो अपमान होता ही है, जो शक्ति रहते हुए कुछ नहीं करता उसे भी अपमानित होना पड़ता है।

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